
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती पर दिल्ली की MP-MLA कोर्ट ने बड़ा हथौड़ा मारा है। 25 साल पुराने एफडी घोटाले में गुरुवार को उन्हें 3 साल की सजा सुनाई गई — और अब उनकी विधायकी दांव पर लग गई है।
क्या है पूरा मामला?
बात साल 1998 की है। तब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के नाम से चलने वाली संस्था के लिए ₹10 लाख की FD कराई — और फिर फर्जी कागजों के जरिए उस पर ब्याज निकाल लिया। उस वक्त ब्याज दर 13.5% थी और FD की अवधि 3 साल तय थी। यानी सरकारी पद का इस्तेमाल करके सीधे बैंक को चूना लगाया गया।
कोर्ट ने किन धाराओं में माना दोषी?
दिल्ली की MP-MLA कोर्ट ने भारती को कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया है —
- धारा 120B — आपराधिक साजिश
- धारा 420 — धोखाधड़ी
- धारा 467, 468, 471 — जालसाजी और फर्जी दस्तावेज
दो धाराओं में 3-3 साल और एक में 2 साल की सजा सुनाई गई। मामले में सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी करार दिया गया है।
तो क्या जाएगी विधायकी?
फिलहाल कोर्ट ने सजा के साथ जमानत भी दे दी है, इसलिए भारती तुरंत जेल नहीं जाएंगे। लेकिन कानूनी संकट अभी टला नहीं है।
वरिष्ठ वकीलों के मुताबिक उनके पास हाईकोर्ट में अपील के लिए 60 दिन का वक्त है। अगर हाईकोर्ट सजा पर स्टे दे देता है, तो विधायकी बच सकती है — वरना सदस्यता जाना तय माना जा रहा है।
कांग्रेस के लिए बड़ा झटका
दतिया जैसी अहम सीट पर यह फैसला कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकता है। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट पर टिकी हैं — अगले 60 दिन राजेंद्र भारती की राजनीतिक जिंदगी का फैसला करेंगे।
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