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MP में जनगणना से पहले संकट: प्रश्नावली जारी, लेकिन जनगणना निदेशक का पद खाली

24 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP में जनगणना से पहले संकट: प्रश्नावली जारी, लेकिन जनगणना निदेशक का पद खाली

MP में जनगणना से पहले संकट: प्रश्नावली जारी, लेकिन जनगणना निदेशक का पद खाली

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया यानी जनगणना की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन मध्यप्रदेश में इसकी तैयारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जहां मकान गणना के लिए तारीखों के बाद अब पूरी प्रश्नावली भी जारी कर दी है, वहीं एमपी में अब तक जनगणना निदेशक का पद खाली पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि सवा दो महीने बाद मकानों की गिनती शुरू होने जा रही है, लेकिन इस अहम काम की कमान अब भी प्रभारी अधिकारी के भरोसे है।


केंद्र ने जारी की मकान गणना की प्रश्नावली

22 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनगणना के पहले चरण यानी मकान गणना के लिए विस्तृत प्रश्नावली जारी कर दी है। इस प्रश्नावली में बताया गया है कि प्रगणक घर-घर जाकर किन-किन विषयों पर जानकारी जुटाएंगे। इससे केंद्र सरकार को अप्रैल में ही यह पता चल जाएगा कि देश में एससी, एसटी और अन्य वर्गों की कितनी आबादी मकानों में रह रही है और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति क्या है।


एमपी में क्यों खाली है जनगणना निदेशक का पद

मध्यप्रदेश में जनगणना निदेशक का पद सितंबर से खाली है। उस समय पद पर तैनात एमपी कैडर की आईएएस अधिकारी भावना वालिम्बे के रिटायर होने के बाद से अब तक कोई स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी है। इस पद को केंद्र सरकार की सहमति से भरा जाना होता है, लेकिन करीब चार महीने बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार किसी अधिकारी का नाम फाइनल नहीं कर पाई है।


प्रभारी के भरोसे चल रही जिम्मेदारी

फिलहाल एमपी में जनगणना निदेशक का अतिरिक्त प्रभार छत्तीसगढ़ के जनगणना निदेशक के पास है। शुरुआत में आईएएस अधिकारी सूफिया फारुकी वली का नाम फाइनल माना जा रहा था, लेकिन वे बाद में एफसीआई में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चली गईं। इसके बाद से यह अहम पद खाली पड़ा है, जिससे तैयारियों पर असर पड़ रहा है।


जाति से लेकर रसोई तक जुटेगा डेटा

मकान गणना की प्रश्नावली का 12वां सवाल जाति से जुड़ा है। इसमें प्रगणक यह पूछेंगे कि संबंधित व्यक्ति एससी, एसटी या अन्य वर्ग से है। इसके साथ ही घर में खाना बनाने के लिए कौन-सा ईंधन इस्तेमाल होता है—एलपीजी, पीएनजी या कोई अन्य स्रोत—यह भी दर्ज किया जाएगा। यहां तक कि परिवार में इस्तेमाल होने वाले मुख्य अनाज की जानकारी भी ली जाएगी।


वाहनों और डिजिटल साधनों की भी होगी गिनती

प्रश्नावली में यह भी पूछा जाएगा कि परिवार के पास कार, जीप, वैन, मोटरसाइकिल, साइकिल या मोपेड है या नहीं। साथ ही मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर जैसे डिजिटल उपकरणों की जानकारी भी जुटाई जाएगी। इससे सरकार यह आकलन कर सकेगी कि कितने लोग सुविधाभोगी श्रेणी में आते हैं।


मकानों के उपयोग पर भी होगी नजर

सरकार यह भी पता लगाएगी कि कितने लोग अपने मकानों का उपयोग निजी निवास के लिए कर रहे हैं और कितने लोग व्यवसायिक गतिविधियों के लिए। इसके अलावा किराए पर दिए गए मकानों की स्थिति भी साफ हो जाएगी।


दो चरणों में होगी जनगणना

भारत की 16वीं और आजादी के बाद 8वीं जनगणना दो चरणों में होगी। पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा, जिसमें मकानों की गणना की जाएगी। दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा, जिसमें जनसंख्या, जाति और अन्य सामाजिक-आर्थिक जानकारियां जुटाई जाएंगी। इसके लिए 16 जून 2024 को अधिसूचना जारी की जा चुकी है।


डेढ़ लाख कर्मचारियों की होगी तैनाती

प्रदेश में फरवरी 2026 तक पहले चरण के लिए लगभग डेढ़ लाख कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। 20 दिनों में डिजिटल तरीके से मकान गणना पूरी की जाएगी और फिर डेटा को संकलित कर जनगणना आयुक्त को भेजा जाएगा। इस बार पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और टैबलेट आधारित होगी।

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