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सीएसआईआर-एम्प्री बनेगा पीडब्ल्यूडी का तकनीकी साझेदार, जिओपॉलीमर कंक्रीट से बदल सकती है सड़क निर्माण की तस्वीर

03 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सीएसआईआर-एम्प्री बनेगा पीडब्ल्यूडी का तकनीकी साझेदार, जिओपॉलीमर कंक्रीट से बदल सकती है सड़क निर्माण की तस्वीर
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बुधवार को सीएसआईआर-एम्प्री, भोपाल का भ्रमण कर संस्थान में विकसित आधुनिक निर्माण तकनीकों और नवीन निर्माण सामग्रियों का अवलोकन किया। उन्होंने सड़क, पुल और भवन निर्माण में स्वदेशी, पर्यावरण-अनुकूल, टिकाऊ तथा लागत-किफायती तकनीकों को अपनाने की संभावनाओं का परीक्षण कर अधिकारियों को इन्हें पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से लागू करने के निर्देश दिए।


भ्रमण के दौरान मंत्री ने जिओपॉलीमर कंक्रीट तकनीक की विशेष जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि इससे निर्मित सड़क में सामान्य कंक्रीट की तरह पानी से तराई करने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पानी की बचत होती है। कम मोटाई में भी एम-40 के अनुरूप मजबूती हासिल की जा सकती है। इस तकनीक का एम्स भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उपयोग किया जा चुका है।


मंत्री राकेश सिंह ने जिओपॉलीमर कंक्रीट को मध्यप्रदेश की सड़क परियोजनाओं के लिए उपयोगी तकनीक बताते हुए इसके व्यापक इस्तेमाल की संभावनाओं का तकनीकी परीक्षण कराने के निर्देश दिए।


औद्योगिक कचरे से बन रहे निर्माण उत्पाद

मंत्री ने फ्लाई ऐश और रेड मड सहित औद्योगिक एवं कृषि अपशिष्टों से तैयार सड़क निर्माण सामग्री, पेवर ब्लॉक, कर्ब स्टोन और ड्रेनेज ब्लॉक का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि सीएसआईआर-एम्प्री में करीब 16 वर्ष पहले लगाए गए पेवर ब्लॉक आज भी मजबूत स्थिति में हैं और उन पर काई तक नहीं लगी है। इससे इन उत्पादों की दीर्घकालिक मजबूती और टिकाऊपन का पता चलता है। उन्होंने बैम्बू कंपोजिट एवं हाइब्रिड वुड, रेड मड आधारित रेडिएशन शील्डिंग टाइल्स, एंटी-कोरोसिव एवं फायर-रेसिस्टेंट कोटिंग्स तथा कृषि अवशेषों से तैयार ग्रीन बाइंडर्स जैसी तकनीकों की भी जानकारी ली।


इंजीनियर्स डे पर एमओयू की तैयारी

मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से मजबूत, टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का निर्माण सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-एम्प्री में विकसित तकनीकों को लोक निर्माण विभाग की परियोजनाओं में व्यापक स्तर पर उपयोग करने के लिए संस्थान को PWD का तकनीकी साझेदार बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आगामी इंजीनियर्स डे के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में सीएसआईआर-एम्प्री के साथ एमओयू करने की योजना है। इसके माध्यम से आधुनिक निर्माण तकनीक, नवीन निर्माण सामग्री, गुणवत्ता परीक्षण और तकनीकी परामर्श के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाएगा।


पायलट प्रोजेक्ट के बाद बड़े स्तर पर इस्तेमाल

मंत्री ने अधिकारियों को सीएसआईआर-एम्प्री के साथ समन्वय कर उपयुक्त तकनीकों का तकनीकी परीक्षण कराने और पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर PWD की परियोजनाओं में उनका उपयोग शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिओपॉलीमर कंक्रीट जैसी तकनीकों से निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन बढ़ाने के साथ पानी की बचत तथा औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग के जरिए पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इस दौरान मंत्री ने एम्प्री की मटेरियल कैरेक्टराइजेशन प्रयोगशाला का निरीक्षण किया और निर्माण सामग्री की मजबूती, टिकाऊपन एवं गुणवत्ता की जांच के लिए उपलब्ध आधुनिक परीक्षण मशीनों की कार्यप्रणाली की जानकारी ली।


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