
भोपाल। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में बुधवार को महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि सीएसआर केवल गतिविधियां पूरी करने तक सीमित न रहे, बल्कि समुदायों को मजबूत करने और लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाने का माध्यम बने। प्रदेश की परिस्थितियों को देखते हुए सीएसआर परियोजनाएं स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार की जानी चाहिए।
मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं और कॉरपोरेट संस्थानों की विशेषज्ञता व संसाधनों के बेहतर तालमेल से दीर्घकालिक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने जरूरतों की पहचान, स्पष्ट प्राथमिकताओं, प्रभावी मॉनिटरिंग और परिणामों के मापन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सीएसआर पोर्टल के साथ मध्यप्रदेश का पंखुड़ी पोर्टल भी सरकार और संभावित सीएसआर साझेदारों के बीच सेतु का काम कर सकता है।
2024-25 में 1,195 करोड़ से अधिक सीएसआर खर्च
एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश में वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 1,195.34 करोड़ रुपये सीएसआर पर खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि इसमें जेंडर इक्विटी और महिला सशक्तिकरण से जुड़े क्षेत्रों की हिस्सेदारी करीब दो प्रतिशत है, जिसमें आगे निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने राज्य और जिला स्तर पर जरूरतों की बेहतर मैपिंग, सरकारी प्राथमिकताओं और कंपनियों की रुचि के बीच समन्वय तथा सीएसआर पोर्टल को मजबूत करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि ऐसी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिनके परिणाम मापे जा सकें और जिन्हें लंबे समय तक संचालित किया जा सके।
61 लाख से अधिक बच्चों के लिए सीएसआर की संभावनाएं
महिला एवं बाल विकास आयुक्त संदीप जीआर ने कहा कि प्रदेश में करीब 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 61 लाख से अधिक बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीएसआर के जरिए आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं और स्थानीय नवाचारों को मजबूती दी जा सकती है। उन्होंने स्थानीय खाद्य सामग्री पर आधारित ‘रंगीन रोटी’ जैसी पहल का उदाहरण देते हुए कहा कि सहजन की पत्तियों और मिलेट्स जैसी पौष्टिक स्थानीय सामग्री को रोजमर्रा के भोजन में शामिल कर व्यवहारिक पोषण मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।
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