
इंदौर। नए साल की शुरुआत के साथ ही साइबर ठगों ने युवाओं को फंसाने का एक और खतरनाक पैंतरा चला है। इंदौर के नाम पर बनाई गई फर्जी एस्कॉर्ट सर्विस वेबसाइट के जरिए कॉलेज छात्रों को निशाना बनाकर हजारों रुपये ऐंठ लिए गए। चमकदार फोटो, मीठी बातें और तुरंत सर्विस के झूठे वादों में फंसकर कई युवा अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठे। मामला उजागर होते ही साइबर क्राइम सेल हरकत में आ गया है।
फर्जी वेबसाइट से खड़ा किया ठगी का पूरा नेटवर्क
साइबर अपराधियों ने “इंदौर एस्कॉर्ट सर्विस” के नाम से एक प्रोफेशनल दिखने वाली वेबसाइट तैयार की थी। इस साइट पर सैकड़ों युवतियों की तस्वीरें, आकर्षक प्रोफाइल और संपर्क के लिए मोबाइल–व्हाट्सऐप नंबर दिए गए थे। दावा किया जाता था कि ग्राहक को “ऑन डिमांड कॉल गर्ल सर्विस” तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। लंबे समय तक यह वेबसाइट पुलिस की नजरों से बची रही।
फोटो भेजकर भरोसा जीतते थे जालसाज
वेबसाइट पर दिए नंबर पर कॉल करने वाले को एक एजेंट संभालता था। वह व्हाट्सऐप पर लगभग 30 युवतियों की तस्वीरें भेजता और पसंद पूछता। फोटो चुनने के बाद ग्राहक से होटल या लोकेशन पूछी जाती और कहा जाता कि कुछ ही देर में युवती पहुंच जाएगी। इसी भरोसे में आकर लोग ऑनलाइन भुगतान कर देते थे।
10 ट्रांजेक्शन में उड़ाए 75 हजार
एडिशनल डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया के मुताबिक कुछ कॉलेज छात्रों ने शिकायत दर्ज कराई है। छात्रों ने गूगल पर “इंदौर एस्कॉर्ट सर्विस एंड कॉल गर्ल” सर्च किया था, जिसके बाद उन्हें यह फर्जी वेबसाइट मिली। आरोपियों ने अलग–अलग बहाने बनाकर 10 बार में करीब 75 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए। जिन बैंक खातों में रकम गई, उन्हें फिलहाल ब्लॉक करा दिया गया है।
पेमेंट के बाद शुरू होता असली खेल
ठग पहले प्रति घंटे 3 से 6 हजार रुपये की डील तय करते थे। क्यूआर कोड से भुगतान होते ही कभी सिक्योरिटी चार्ज, कभी रजिस्ट्रेशन तो कभी पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर और पैसे मांगने लगते। जैसे ही ग्राहक मना करता, कॉल और मैसेज बंद कर दिए जाते।
पुलिस की अपील – रहें सतर्क
साइबर क्राइम सेल ने युवाओं से अपील की है कि ऐसी वेबसाइटों और अनजान नंबरों पर भरोसा न करें। ऑनलाइन किसी भी तरह की संदिग्ध सर्विस के लिए पेमेंट करने से पहले पूरी जांच करें। अजनबी क्यूआर कोड पर पैसा भेजना सबसे बड़ा खतरा है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

