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Madhaya Pradesh

MP Police Meditation: 21 दिसंबर को 50 हजार पुलिसकर्मी एक साथ करेंगे ध्यान

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MP Police Meditation: 21 दिसंबर को 50 हजार पुलिसकर्मी एक साथ करेंगे ध्यान

MP Police Meditation: 21 दिसंबर को 50 हजार पुलिसकर्मी एक साथ करेंगे ध्यान

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

पुलिस की कार्यशैली में अब सिर्फ सख्ती नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और मानसिक शांति भी शामिल की जा रही है। तनाव और मानसिक दबाव से जूझ रहे पुलिसकर्मियों को राहत देने के लिए एक नया और अनोखा प्रयोग करने जा रही है।


21 दिसंबर को एक साथ होगा ध्यान

21 दिसंबर को ‘विश्व ध्यान दिवस’ के अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों की पुलिस एक साथ ध्यान करेगी। रात 8 बजे से 8.30 बजे तक राज्य के सभी थानों, बटालियनों और पुलिस कार्यालयों में 50 हजार से ज्यादा जवान और अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से सामूहिक ध्यान करेंगे।


तनाव और मानसिक रोगों से राहत का प्रयास

फील्ड ड्यूटी का दबाव, लंबी ड्यूटी और परिवार से दूरी के कारण कई पुलिसकर्मी मानसिक रोगों का शिकार हो जाते हैं। विभाग का मानना है कि यह 20 मिनट का सामूहिक मौन न सिर्फ विश्व शांति की कामना है, बल्कि जवानों के भीतर की उथल-पुथल को शांत करने का एक सशक्त माध्यम भी है।


पुलिस की छवि और खुशहाली पर असर

इस पहल से पुलिसकर्मियों को तनाव से मुक्ति मिलेगी और पुलिस की छवि में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। विभाग का कहना है कि यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश पुलिस की खुशहाली का माध्यम बन रहा है।


21 दिसंबर से जुड़ी खास पहल

हर थाने में बनेगा ‘ध्यान कक्ष’

पुलिसकर्मियों को सुकून के पल देने के लिए प्रदेश के हर थाने में विशेष ‘मेडिटेशन रूम’ तैयार किया जाएगा।


हर रविवार अनिवार्य ध्यान सत्र

जनवरी–फरवरी से हर रविवार सुबह 10 बजे 30 मिनट का अनिवार्य ध्यान सत्र आयोजित होगा। जवान जहां तैनात हैं, वहीं से इस सत्र का हिस्सा बन सकेंगे।


तैयार हो रही ‘ट्रेनर्स’ की फौज

अब तक 80 ट्रेनर तैयार किए जा चुके हैं और 36 ट्रेनर इसी महीने ट्रेनिंग लेने जा रहे हैं। जल्द ही यह संख्या 500 से 1000 तक पहुंचाई जाएगी, ताकि हर इकाई में एक ‘मेडिटेशन मास्टर’ उपलब्ध हो सके।


सर्वधर्म समावेशी ध्यान तकनीक

यह ध्यान प्रक्रिया पूरी तरह सरल और धर्मनिरपेक्ष है, ताकि हर समाज और वर्ग का पुलिसकर्मी इसे आसानी से अपना सके।


नई सोच, नई दिशा

यह पहल बताती है कि पुलिस बल की मजबूती सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और आंतरिक शांति से भी आती है। मध्य प्रदेश पुलिस का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है।

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