
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दमोह जिले ने बीते कुछ वर्षों में खेती-किसानी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। किसानों की आमदनी बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। खेत से बाजार तक और खाद से किसानों के खातों तक स्थायी एवं मजबूत व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को मंत्रालय से दमोह में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसानों के परिश्रम से पैदा होने वाला अनाज का प्रत्येक दाना सरकार के लिए भगवान के प्रसाद के समान है। मुख्यमंत्री ने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान और ज्वार-बाजरा उपार्जन के लिए किसान पंजीयन 15 सितंबर से शुरू हो गया है, जो 10 अक्टूबर तक चलेगा। उन्होंने किसानों से फसल विविधीकरण, नई तकनीक, उद्यानिकी, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, गौपालन और मछली पालन जैसे क्षेत्रों को अपनाकर आय बढ़ाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दमोह में करीब 6.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हो रही है, जिसमें 86 प्रतिशत कृषि क्षेत्र सिंचित है। जिले का चना देशभर में प्रसिद्ध है और खाद्य प्रसंस्करण व एग्रो प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग में भी संभावनाएं बढ़ रही हैं। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, सांसद राहुल सिंह लोधी, विधायक जयंत मलैया, विधायक उमादेवी खटीक सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
सिंचाई परियोजनाओं से बढ़ेगी कृषि क्षमता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना दमोह के लिए वरदान साबित होगी। तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ रुपये से अधिक की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना से 17 से अधिक गांवों की करीब 3,600 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। सतधरु सिंचाई परियोजना, पारना जलाशय और दादपुर स्टाप डेम के निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहे हैं।
दमोह में सूक्ष्म सिंचाई का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य
सरकार ने दमोह में सूक्ष्म सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 1.35 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। जिले के सभी सात विकासखंडों में जैविक एवं प्राकृतिक खेती हाट बाजार भी शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए किसान क्रेडिट कार्ड का ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके जरिए किसान एक क्लिक में अपना क्रेडिट कार्ड बनवा सकेंगे। उन्होंने ने प्रगतिशील किसानों खम्मन सिंह लोधी, समीर कुमार अहिरवाल और राम कुरेरिया से संवाद कर उनकी खेती-किसानी की जानकारी भी ली।
अश्वगंधा के बाद अब मखाने की खेती
दमोह में हाई-वैल्यू क्रॉप को बढ़ावा दिया जा रहा है। अश्वगंधा की खेती के लिए 100 से अधिक किसानों को नि:शुल्क बीज और प्रशिक्षण दिया गया है। आगामी खरीफ सीजन में मखाने का उत्पादन भी नवाचार के रूप में शुरू किया जाएगा। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए बीते एक वर्ष में जिले में 9 नई दुग्ध सहकारी संस्थाएं पंजीकृत हुई हैं। क्षीरधारा ग्राम योजना के पहले चरण में 65 गांवों का चयन किया गया है। वहीं मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के तहत 14 स्वच्छ फिश पार्लर बनाए जा रहे हैं।
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