
भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए पूर्व गृहमंत्री और छह बार के विधायक डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। 36 वर्षों के चुनावी सफर में यह पहला मौका है जब डॉ. मिश्रा पार्टी के टिकट से चुनावी मैदान से बाहर हो गए हैं।
इस निर्णय के बाद दतिया और डबरा में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। टिकट घोषित होते ही समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, कई स्थानों पर बाजार बंद कराए गए, जबकि अब कांग्रेस के प्रत्याशी के ऐलान पर भी सबकी नजर टिक गई है।
36 साल बाद पहली बार टिकट नहीं मिला
डॉ. नरोत्तम मिश्रा का चुनावी सफर 1990 में डबरा विधानसभा सीट से पहली जीत के साथ शुरू हुआ था। उन्होंने तीन बार डबरा और परिसीमन के बाद तीन बार दतिया से विधानसभा चुनाव जीता। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार का सामना करना पड़ा था। बाद में राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद दतिया सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनी।
तैयारी पूरी थी, फिर बदला फैसला
भाजपा के भीतर लंबे समय तक यह माना जा रहा था कि पार्टी एक बार फिर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार बनाएगी। उन्होंने जनसंपर्क अभियान चलाया, विभिन्न समाजों की बैठकें कीं, कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए और नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। अंतिम चरण में पार्टी नेतृत्व ने संगठन से जुड़े नेता आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी घोषित कर सभी राजनीतिक अटकलों पर विराम लगा दिया।
सर्वे और संगठनात्मक फीडबैक बना आधार
पार्टी सूत्रों के अनुसार उम्मीदवार चयन में संगठन की आंतरिक फीडबैक प्रक्रिया और सर्वे रिपोर्ट को अहम माना गया। इन्हीं संकेतों के आधार पर नेतृत्व ने आशुतोष तिवारी के नाम पर अंतिम फैसला लिया।
कौन हैं आशुतोष तिवारी
आशुतोष तिवारी का राजनीतिक कार्य मुख्य रूप से संगठन से जुड़ा रहा है। उनके प्रमुख दायित्व इस प्रकार रहे हैं—
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े सहयोगी संगठन ग्राम भारती के जिला संयोजक।
भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री की जिम्मेदारी।
मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष।
वर्तमान में भाजपा के विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रभारी।
टिकट घोषित होते ही विरोध प्रदर्शन
उम्मीदवार की घोषणा के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थक सड़कों पर उतर आए। दतिया में कई स्थानों पर बाजार बंद कराए गए और व्यापारियों ने भी विरोध दर्ज कराया। डबरा में भी समर्थकों ने प्रदर्शन किया। दूसरी ओर भाजपा संगठन नए उम्मीदवार के समर्थन में कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में जुट गया है।
2028 की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा फैसला
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले चेहरे को आगे बढ़ाकर आगामी नगरीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक कदम उठाया है। संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय को भी इस फैसले का अहम पहलू माना जा रहा है।
कांग्रेस के उम्मीदवार का इंतजार
भाजपा की घोषणा के बाद अब कांग्रेस पर भी प्रत्याशी घोषित करने का दबाव बढ़ गया है। पार्टी ने अभी तक उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है। पूर्व विधायक घनश्याम सिंह और अवधेश नायक के नाम संभावित दावेदारों में चर्चा में हैं।
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