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दतिया में भाजपा की सबसे बड़ी परीक्षा, उम्मीदवार बदलते ही सरकार और संगठन दोनों के लिए प्रतिष्ठा का मुकाबला बना उपचुनाव

11 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
दतिया में भाजपा की सबसे बड़ी परीक्षा, उम्मीदवार बदलते ही सरकार और संगठन दोनों के लिए प्रतिष्ठा का मुकाबला बना उपचुनाव
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बदलने का भाजपा का फैसला अब केवल एक टिकट परिवर्तन नहीं रह गया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने के साथ ही यह चुनाव सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की राजनीतिक साख से जुड़ गया है।


अब भाजपा के सामने सिर्फ सीट जीतने की चुनौती नहीं है, बल्कि यह साबित करने की भी जिम्मेदारी है कि अंतिम समय में लिया गया फैसला चुनावी लिहाज से सही था। इसी कारण दतिया उपचुनाव सरकार और संगठन दोनों के लिए प्रतिष्ठा का मुकाबला बन गया है।


अब पूरी रणनीति बदलनी पड़ेगी

करीब चार महीने तक चुनावी तैयारी करने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम प्रदेश भाजपा ने केंद्रीय नेतृत्व को भेजा था। 6 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद उनका नाम आगे बढ़ाया गया, लेकिन दिल्ली में मिले फीडबैक के बाद पार्टी ने अंतिम समय में आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया। उम्मीदवार बदलने के इस फैसले ने भाजपा को पूरे चुनावी अभियान की रूपरेखा दोबारा तैयार करने की स्थिति में ला खड़ा किया है। अब प्रचार, संगठन और स्थानीय समीकरणों पर नई रणनीति बनानी होगी।


पहली बड़ी परीक्षा में हेमंत खंडेलवाल

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत खंडेलवाल के सामने यह पहला विधानसभा उपचुनाव है। ऐसे में दतिया का परिणाम केवल एक सीट का नतीजा नहीं माना जाएगा, बल्कि संगठन की चुनावी क्षमता का भी आकलन करेगा। यदि पार्टी यह सीट जीतती है तो उम्मीदवार बदलने का फैसला सही साबित होगा। परिणाम विपरीत आने पर इस निर्णय पर सवाल उठना तय माना जा रहा है।


मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा भी दांव पर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह उपचुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। उम्मीदवार बदलने के बाद जीत की पूरी जिम्मेदारी अब सरकार और संगठन दोनों पर आ गई है। चुनावी नतीजे को मुख्यमंत्री की राजनीतिक रणनीति और नेतृत्व क्षमता के पैमाने पर भी देखा जाएगा।


दिल्ली में हुई राजनीतिक पड़ताल के बाद बदल गया पूरा समीकरण

दतिया सीट को लेकर प्रदेश स्तर पर तस्वीर लगभग साफ मानी जा रही थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद 6 जुलाई को प्रदेश भाजपा ने केंद्रीय नेतृत्व के पास डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम भेज दिया था। अंतिम फैसला सिर्फ औपचारिकता माना जा रहा था, लेकिन दिल्ली में हुई राजनीतिक समीक्षा ने घटनाक्रम की दिशा ही बदल दी।


पार्टी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची चुनावी रिपोर्ट में नरोत्तम मिश्रा को लेकर अपेक्षित सकारात्मक संकेत नहीं मिले। इसके अलावा उनके बेटे सुकर्ण मिश्रा के राजनीतिक प्रभाव और स्थानीय माहौल पर भी अलग से इनपुट जुटाए गए। जब सभी रिपोर्ट एक साथ रखी गईं तो नेतृत्व ने जोखिम लेने के बजाय ऐसा चेहरा चुनने का फैसला किया, जिसे जीत की दौड़ में अधिक उपयुक्त माना गया। इसी प्रक्रिया के बाद आशुतोष तिवारी के नाम पर अंतिम सहमति बनी।


क्या नया पावर सेंटर बनने की आशंका भी बनी वजह?

दतिया में उम्मीदवार बदलने के फैसले को राजनीतिक विश्लेषक केवल चुनावी रणनीति तक सीमित नहीं मान रहे हैं। उनकी राय है कि यदि डॉ. नरोत्तम मिश्रा उपचुनाव जीतकर विधानसभा लौटते तो सरकार में उनकी भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकती थी। मंत्री पद के साथ प्रभावशाली विभाग मिलने की संभावनाएं भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनतीं।


प्रदेश की मौजूदा राजनीति में पहले से कई प्रभावशाली चेहरे सक्रिय हैं। कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और वीडी शर्मा की मौजूदगी के बीच पार्टी नेतृत्व किसी नए प्रभाव केंद्र के उभरने से बचना चाहता था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उम्मीदवार चयन में चुनाव जीतने की रणनीति के साथ-साथ सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखने का पहलू भी निर्णायक रहा।


नाराज समर्थकों को साधना सबसे बड़ी चुनौती

उम्मीदवार बदलने के बाद भाजपा के सामने संगठनात्मक असंतोष को संभालना भी बड़ी चुनौती बन गया है।

- रघुवीर कुशवाह समेत कई पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई।

- दतिया, डबरा और ग्वालियर तक विरोध के स्वर सामने आए।

- जिला संगठन से लेकर बूथ स्तर तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा समर्थकों का मजबूत नेटवर्क सक्रिय माना जाता है।


ऐसे में आशुतोष तिवारी की जीत केवल विपक्ष से मुकाबले पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि भाजपा को अपने ही संगठन को एकजुट रखने की परीक्षा भी देनी होगी। 


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