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दतिया उपचुनाव में बूथ से बिरादरी तक पूरी ताकत, भाजपा और कांग्रेस ने झोंकी संगठन की पूरी शक्ति

16 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
दतिया उपचुनाव में बूथ से बिरादरी तक पूरी ताकत, भाजपा और कांग्रेस ने झोंकी संगठन की पूरी शक्ति
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव अब केवल सभाओं और जनसभाओं तक सीमित नहीं रह गया है। मतदान की तारीख नजदीक आते ही दोनों प्रमुख दलों ने बूथ स्तर पर अपनी रणनीति तेज कर दी है और सामाजिक समीकरण साधने पर पूरा फोकस कर रहे हैं।


भाजपा और कांग्रेस इस सीट को प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर मैदान में हैं। दोनों दलों का जोर अब इस बात पर है कि मतदान के दिन अधिक से अधिक समर्थक वोटर मतदान केंद्र तक पहुंचें।


भाजपा ने 291 मतदान केंद्रों पर तैयार किया बूथ नेटवर्क

भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पार्टी ने विधानसभा के सभी 291 मतदान केंद्रों पर बूथ प्रभारी नियुक्त किए हैं। पूरे क्षेत्र को 21 शक्ति केंद्रों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक शक्ति केंद्र की जिम्मेदारी विधायक और पूर्व विधायकों को सौंपी गई है। उनकी भूमिका केवल प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं का समन्वय, मतदाताओं से संपर्क और मतदान प्रतिशत बढ़ाने पर भी है।


जातीय समीकरणों पर भाजपा का खास फोकस

भाजपा ने विधानसभा के 6 मंडलों में स्थानीय सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए नेताओं की जिम्मेदारियां तय की हैं। ब्राह्मण समाज के बीच पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, मंत्री राकेश शुक्ला, गोपाल भार्गव और शैलेंद्र बरुआ सक्रिय हैं। क्षत्रिय समाज में मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित अन्य वरिष्ठ नेता प्रचार संभाल रहे हैं। कुशवाहा समाज तक पहुंच बनाने के लिए मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, सांसद भारत सिंह कुशवाहा और जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा जनसंपर्क कर रहे हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री दिलीप अहिरवार और सांसद संध्या राय को जिम्मेदारी दी गई है।


चुनाव संचालन समिति में वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी

भाजपा की चुनाव संचालन समिति में पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, विधायक प्रदीप अग्रवाल, सांसद संध्या राय, जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा सहित कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। नामांकन के बाद से प्रदेश के कई मंत्री और संगठन पदाधिकारी भी दतिया में सक्रिय हैं।


भाजपा की प्रमुख चुनावी रणनीति

  • 291 मतदान केंद्रों पर बूथ प्रभारी

  • 21 शक्ति केंद्रों की अलग जिम्मेदारी

  • 6 मंडलों में सामाजिक समीकरण के अनुसार नेतृत्व

  • प्रदेश के मंत्री और संगठन पदाधिकारी लगातार सक्रिय


कांग्रेस ने भी सामाजिक वर्गों के हिसाब से बनाई रणनीति

  • कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के समर्थन में पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों के लिए अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी है।

  • ब्राह्मण समाज में पी.पी. शर्मा, हेमंत कटारे, राकेश चतुर्वेदी और प्रवीण पाठक प्रचार कर रहे हैं।

  • क्षत्रिय समाज में डॉ. गोविंद सिंह, जयवर्धन सिंह, राहुल सिंह और नीटू सिकरवार सक्रिय हैं।

  • अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग में फूल सिंह बरैया, महेंद्र बौद्ध, मेवाराम जाटव और सुरेश राजे को जिम्मेदारी दी गई है।

  • ओबीसी मतदाताओं तक पहुंच के लिए सचिन यादव, अशोक सिंह, दिनेश गुर्जर और लखन सिंह मैदान में हैं। मुस्लिम मतदाताओं के बीच आरिफ मसूद प्रचार की कमान संभाल रहे हैं।


संगठनात्मक ताकत पर टिकी नजर

दतिया उपचुनाव में इस बार चर्चा उम्मीदवारों से ज्यादा दोनों दलों की संगठनात्मक तैयारियों की हो रही है। कांग्रेस सामाजिक समीकरणों और स्थानीय असंतोष के सहारे चुनावी बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है। अब सबसे बड़ी परीक्षा मतदान वाले दिन कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ प्रबंधन की होगी।


कांग्रेस की प्रमुख रणनीति

  • हर प्रमुख समाज के लिए अलग वरिष्ठ नेता

  • ब्राह्मण, क्षत्रिय, ओबीसी, एससी-एसटी और मुस्लिम मतदाताओं पर अलग फोकस.

  • विधायक, पूर्व मंत्री और राज्यसभा सांसद तक चुनाव प्रचार में सक्रिय

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