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दतिया उपचुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई, बड़े नेताओं की एंट्री और बूथ स्तर पर बनेगा जीत का प्लान

04 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
दतिया उपचुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई, बड़े नेताओं की एंट्री और बूथ स्तर पर बनेगा जीत का प्लान
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि संगठन और सरकार दोनों की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। विजयपुर उपचुनाव में मिली हार के बाद पार्टी इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है और चुनावी तैयारी को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति बना रही है।


करीब डेढ़ वर्ष पहले विजयपुर उपचुनाव के बाद अब चंबल-ग्वालियर क्षेत्र में दतिया अगला बड़ा चुनावी मैदान बनने जा रहा है। भाजपा ने संकेत दिए हैं कि इस सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय भागीदारी के साथ विस्तृत माइक्रो प्लान लागू किया जाएगा।


दतिया सीट पर भाजपा की विशेष नजर

दतिया विधानसभा लंबे समय तक भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। पार्टी ने यहां लगातार 15 वर्षों तक कब्जा बनाए रखा, लेकिन 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए। इसी वजह से आगामी उपचुनाव को भाजपा बेहद गंभीरता से ले रही है।


अगले सप्ताह हो सकती है अहम रणनीतिक बैठक

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के पारिवारिक कार्यक्रम से लौटने के बाद सत्ता और संगठन की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अगले सप्ताह होने वाली इस बैठक में बूथ स्तर तक चुनावी रणनीति तैयार की जाएगी।


चुनाव संचालन के लिए वरिष्ठ नेताओं की एक विशेष टीम बनाई जाएगी, जो चुनाव प्रभारी के नेतृत्व में पूरे अभियान की जिम्मेदारी संभालेगी।


नरोत्तम मिश्रा ने बढ़ाई जनसंपर्क की रफ्तार

पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी क्षेत्र में अपनी सक्रियता तेज कर दी है। यदि भाजपा उन्हें उम्मीदवार बनाती है तो यह चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।


गृह मंत्री रहते हुए 2023 विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद मिश्रा लगातार क्षेत्र में लोगों से संपर्क कर रहे हैं। वे सार्वजनिक रूप से यह भी कह रहे हैं कि यदि उनसे कोई कमी रह गई है तो उसे सुधारने का प्रयास करेंगे।


विजयपुर की हार से लिया सबक

दतिया में भाजपा की अतिरिक्त सतर्कता के पीछे विजयपुर उपचुनाव का अनुभव भी बड़ी वजह है। वहां पार्टी ने कांग्रेस छोड़कर आए रामनिवास रावत को वन मंत्री बनाया था, लेकिन वे कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा से 7,288 वोटों से चुनाव हार गए।


इस हार ने भाजपा की चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े किए थे। अब पार्टी दतिया में उसी तरह की स्थिति दोहराने से बचना चाहती है।


बूथ स्तर तक होगी तैयारी

भाजपा संगठन ने स्थानीय स्तर पर चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं।

बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है।

माइक्रो लेवल चुनावी प्रबंधन पर विशेष फोकस रहेगा।

वरिष्ठ नेताओं की निगरानी में चुनाव अभियान संचालित होगा।

विजयपुर उपचुनाव में हुई रणनीतिक कमियों को दोहराने से बचने की तैयारी की जा रही है।

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