
भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में पूर्व गृहमंत्री डॉ। नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद भाजपा के भीतर असंतोष अब खुली बगावत में बदलता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को सैकड़ों कार्यकर्ता दतिया-झांसी हाईवे पर उतर आए और सड़क जाम कर पार्टी नेतृत्व के फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
करीब तीन किलोमीटर लंबे जाम से यातायात ठप हो गया। टिकट बदलने की मांग को लेकर कार्यकर्ताओं ने साफ संदेश दिया कि यदि पार्टी नेतृत्व ने फैसला नहीं बदला तो उपचुनाव में भाजपा को ही विरोध का सामना करना पड़ेगा।
संगठन में मचा भूचाल, इस्तीफों की झड़ी
बवाल के बीच सबसे बड़ा झटका संगठन को लगा है। भाजपा के जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को अपना सामूहिक इस्तीफा भेज दिया है। पत्र में साफ तौर पर केंद्रीय नेतृत्व के फैसले को 'एकतरफा' और कार्यकर्ताओं का अपमान बताया गया है। कुशवाह ने पत्र में लिखा है, ''मैं रघुवीरसिंह कुशवाह जिलाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी दतिया अपने समस्त कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों से बातचीत करने के बाद निर्णय लेता हूं कि पार्टी द्वारा दतिया विधानसभा में होने जा रहे उपचुनाव में लिया गया निर्णय एकतरफा एवं पार्टी के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करते हुये दिया गया है। मैं अपने समस्त पदाधिकारी, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका दतिया अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, बड़ौनी पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, दतिया विधानसभा के 6 मण्डलों के अध्यक्ष, मोर्चा अध्यक्ष, दतिया, बड़ौनी के समस्त पार्षदगण तथा दतिया विधानसभा की 281 बूथों के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी सहित सामूहिक रूप से दायित्वों से इस्तीफा देते हैं। पार्टी चौबीस घण्टे में प्रत्याशी डॉ।नरोत्तम मिश्रा जी को नहीं बनाती है तो पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देंगे। पूरी ताकत से विरोध करेंगे।'’
आशुतोष तिवारी की उम्मीदवारी पर खुला विरोध
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने घोषित उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के खिलाफ खुलकर नारे लगाए। उनका कहना था कि वे आशुतोष तिवारी को नहीं जानते और दतिया के कार्यकर्ताओं की राय को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
हाईवे पर गूंजे नारे, घंटों परेशान रहे यात्री
शाम होते-होते शहर के अलग-अलग वार्डों से भाजपा कार्यकर्ता दतिया-झांसी हाईवे पर जुट गए और सड़क के बीच धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान "नरोत्तम मिश्रा जिंदाबाद", "आशुतोष वापस जाओ" और "टिकट बदलो" जैसे नारे लगातार गूंजते रहे। सड़क जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कार्यकर्ताओं की दो टूक चेतावनी
प्रदर्शन में शामिल एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा कि वे 20 वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन अचानक बाहर से उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। उनका कहना था कि उन्होंने आशुतोष तिवारी को दतिया में कभी सक्रिय नहीं देखा। कार्यकर्ताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि टिकट नहीं बदला गया तो वे उपचुनाव में भाजपा का विरोध करेंगे। उनका कहना था कि जरूरत पड़ने पर कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने का फैसला भी लिया जा सकता है, क्योंकि उनके लिए कार्यकर्ताओं का सम्मान सबसे ऊपर है।
पुलिस पहुंची, जाम खुला लेकिन विरोध नहीं थमा
स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलते ही एसडीएम, सीएसपी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर सड़क खाली कराई। करीब एक घंटे बाद यातायात आंशिक रूप से बहाल हो सका, लेकिन टिकट बदलने की मांग को लेकर कार्यकर्ताओं का विरोध जारी रहा।
टिकट कटना बना सबसे बड़ा सियासी सरप्राइज
दरअसल उपचुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से लगभग सभी प्रमुख अखबारों और टीवी चैनलों पर दतिया से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर सबसे प्रमुख नाम नरोत्तम मिश्रा का ही चल रहा था। ऐसे में अंतिम समय पर उनका टिकट काटे जाने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं तक सभी को चौंका दिया।
भाजपा के संकटमोचक माने जाते रहे हैं नरोत्तम मिश्रा
मध्यप्रदेश की राजनीति में डॉ। नरोत्तम मिश्रा को भाजपा के सबसे प्रभावशाली रणनीतिक नेताओं में गिना जाता रहा है। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सत्ता से बाहर होने के बाद बदले राजनीतिक घटनाक्रम और प्रदेश में चले 'मिशन लोटस' के दौरान भी उनकी भूमिका को भाजपा के अहम चेहरों में शामिल माना जाता रहा। पार्टी के भीतर लंबे समय से उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखा जाता रहा है, जो मुश्किल राजनीतिक परिस्थितियों में संगठन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसलिए भड़का कार्यकर्ताओं का गुस्सा
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि दतिया की राजनीति में नरोत्तम मिश्रा की मजबूत पहचान रही है और वर्षों तक उनके नेतृत्व में संगठन मजबूत हुआ। ऐसे नेता का टिकट कटने से कार्यकर्ताओं ने इसे सामान्य राजनीतिक फैसला नहीं माना। यही वजह रही कि नाराजगी सीधे सड़कों पर दिखाई दी, हाईवे जाम हुआ और संगठन के भीतर इस्तीफों का दौर शुरू हो गया।
टिकट बदलने की मांग पर अड़े समर्थक
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो उपचुनाव में भाजपा को ही विरोध का सामना करना पड़ेगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक टिकट की नहीं, बल्कि वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं के सम्मान की है।
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