
भोपाल। प्रदेश में सियासी पारा ऊपर चढ़ गया है। दतिया विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है। सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया है। देर रात विधानसभा पहुंचे प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया। कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा पहुंचकर विरोध भी प्रदर्शित किया।
दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को गुरुवार को दिल्ली की एमपी एमएलए कोर्ट से तीन साल की सजा सजा सुनाई। साथ ही कोर्ट ने 60 दिन की मोहलत देते हुए राजेंद्र भारती की सजा निलंबित रखी है। सुबह करीब 11:00 बजे फैसला आया और दिन भर तरह-तरह की चर्चाएं चलती रहीं। रात 10:00 बजे के बाद प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा के विधानसभा पहुंचने के बाद हलचल बढ़ गई।
दतिया विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी किए जाने की सूचना मिलते ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा विधानसभा पहुंच गए। प्रमुख सचिव से मिलकर विरोध प्रदर्शन किया। रात में दफ्तर खोलने पर आपत्ति दर्ज कराई।
विधायक की सदस्यता समाप्त किए जाने के संबंध में प्रमुख सचिव की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई। विधानसभा सचिवालय की ओर से इस आदेश पर मुहर लगाई गई।
क्या है पूरा मामला?
बात साल 1998 की है। तब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के नाम से चलने वाली संस्था के लिए ₹10 लाख की FD कराई — और फिर फर्जी कागजों के जरिए उस पर ब्याज निकाल लिया। उस वक्त ब्याज दर 13.5% थी और FD की अवधि 3 साल तय थी। यानी सरकारी पद का इस्तेमाल करके सीधे बैंक को चूना लगाया गया।
कोर्ट ने किन धाराओं में माना दोषी?
दिल्ली की MP-MLA कोर्ट ने भारती को कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया है —
- धारा 120B — आपराधिक साजिश
- धारा 420 — धोखाधड़ी
- धारा 467, 468, 471 — जालसाजी और फर्जी दस्तावेज
दो धाराओं में 3-3 साल और एक में 2 साल की सजा सुनाई गई। मामले में सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी करार दिया गया है।
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