
भोपाल। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने विश्व टीबी दिवस पर गांधी मेडिकल कॉलेज से प्रदेश में 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह महज एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, इसे जनआंदोलन का रूप देना होगा। अभियान में स्वास्थ्य अमले के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए समय पर पहचान, उपचार और पोषण महत्वपूर्ण है। रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान हो जाए, तो इसका प्रभावी और सरल प्रबंधन संभव है। इस दिशा में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को जांच के लिए प्रेरित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेश के आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों व स्वयंसेवी संगठनों से निक्षय पोषण योजना में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने टीबी मरीजों को पोषण सहायता देने में समाज के जागरूक नागरिकों, समाजसेवियों से सक्रिय सहयोग आहवान किया। पूर्व में अभियान में सहयोग देने वाले सभी वर्गों का आभार व्यक्त किया और स्वास्थ्य अमले- डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ व फील्ड वर्कर्स की निरंतर सेवा, समर्पण और कठिन परिश्रम की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश में पूर्व में किए गए समेकित प्रयासों की तरह ही इस बार भी सभी की सहभागिता से हम टीबी को हराकर टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त करेंगे।
एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि मध्यप्रदेश 100 दिवसीय निक्षय भारत अभियान (7 दिसंबर 2024 से 24 मार्च 2025) के दौरान देश में अग्रणी रहा है। इस अवधि में 23 संवेदनशील जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में सघन स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया, जिसमें संभावित मरीजों की पहचान कर उनका उपचार सुनिश्चित किया गया और उन्हें आवश्यक पोषण सहयोग भी प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि इस बार अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकी साधनों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।
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