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देवास में पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका, 3 मजदूरों की मौत; कई लोग गंभीर

14 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
देवास में पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका, 3 मजदूरों की मौत; कई लोग गंभीर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

देवास। मध्यप्रदेश के देवास जिले के टोंक कलां इलाके में गुरुवार सुबह हुए पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट ने पूरे इलाके को दहला दिया। धमाका इतना तेज था कि कई मजदूर दूर तक जा गिरे और आसपास अफरा-तफरी मच गई। हादसे में अब तक 3 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 25 लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई घायलों की हालत गंभीर है।


धमाके में मजदूरों के शव दूर तक गिरे

स्थानीय लोगों के मुताबिक ब्लास्ट बेहद शक्तिशाली था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विस्फोट के बाद शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए और फैक्ट्री परिसर में चीख-पुकार मच गई।


तीन महिलाएं अब भी लापता

हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य जारी है। जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री में बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती थीं। अब भी तीन महिलाओं के लापता होने की सूचना है। प्रशासन उनकी तलाश में जुटा हुआ है।


कैसे हुआ धमाका?

स्थानीय लोगों ने बताया कि फैक्ट्री में दो केमिकल मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। आरोप है कि केमिकल की मात्रा में गड़बड़ी होने के कारण विस्फोट हुआ। जिस समय हादसा हुआ, वहां करीब 15 से 20 मजदूर काम कर रहे थे।


लंच से पहले मचा मौत का मंजर

बताया जा रहा है कि लंच ब्रेक से करीब 15-20 मिनट पहले ही धमाका हुआ। मजदूरों का खाना फैक्ट्री पहुंच चुका था, लेकिन ब्लास्ट के बाद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।


CM मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश

Mohan Yadav ने घटना पर दुख जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए और मृतकों के परिवारों को ₹4-4 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। घायलों के मुफ्त इलाज के निर्देश भी जारी किए गए हैं।


अवैध फैक्ट्री होने के आरोप

घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित हो रही थी और पहले शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने अधिकारियों का घेराव कर सख्त कार्रवाई की मांग की।


सैकड़ों मजदूर करते थे काम

स्थानीय लोगों के अनुसार फैक्ट्री में करीब 400 से 500 मजदूर काम करते थे। पुरुष मजदूरों को करीब ₹400 प्रतिदिन और महिलाओं को लगभग ₹250 प्रतिदिन मजदूरी दी जाती थी। भुगतान हर सप्ताह किया जाता था।

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