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धार में चंबल नदी का पुराना पुल टूटेगा, 5 किमी लंबा डायवर्जन लागू होगा—इंदौर-रतलाम रूट पर बढ़ेगी परेशानी

20 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
धार में चंबल नदी का पुराना पुल टूटेगा, 5 किमी लंबा डायवर्जन लागू होगा—इंदौर-रतलाम रूट पर बढ़ेगी परेशानी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश के धार जिले में जल्द बड़ा बदलाव दिखने वाला है। चंबल नदी पर बना पुराना पुल तोड़कर नया फोरलेन ब्रिज बनाया जाएगा, जिससे इस रूट पर ट्रैफिक पूरी तरह बंद हो जाएगा। सबसे ज्यादा असर इंदौर से रतलाम-नीमच जाने वाले यात्रियों पर पड़ेगा।


पुराना पुल हटेगा, बनेगा फोरलेन ब्रिज

घाटाबिल्लौद क्षेत्र में चंबल नदी पर बना मौजूदा पुल करीब 20 फीट चौड़ा सिंगल लेन ब्रिज है। अब इसकी जगह 24 मीटर चौड़ा फोरलेन पुल बनाया जाएगा, जिसमें दोनों ओर 12-12 मीटर सड़क होगी। यानी भविष्य में यहां से गुजरना ज्यादा आसान और सुरक्षित हो जाएगा।


40 करोड़ का प्रोजेक्ट, 18 महीने की डेडलाइन

इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर करीब ₹40 करोड़ खर्च किए जाएंगे। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 18 महीने का लक्ष्य तय किया गया है, ताकि इसे सिंहस्थ 2028 से पहले तैयार किया जा सके। हालांकि, निर्माण शुरू होते ही लोगों को तत्काल परेशानी का सामना करना पड़ेगा।


5 किमी लंबा डायवर्जन, बदलना होगा रास्ता

ब्रिज निर्माण शुरू होते ही इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी जाएगी। इसके बाद लोगों को करीब 5 किमी अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी और नेशनल हाईवे इंदौर-अहमदाबाद के जरिए लेबड़ तक पहुंचना होगा। डायवर्जन प्लान के तहत पानखेड़ी और लेबड़ रूट पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ना तय है।


अभी से घटा ट्रैफिक, लगाए गए संकेत

हालांकि प्रशासन से डायवर्जन को अंतिम मंजूरी अभी नहीं मिली है, लेकिन विभाग ने पहले ही मार्ग परिवर्तन के बोर्ड लगा दिए हैं। इसका असर यह हुआ है कि पुल पर वाहनों का दबाव अभी से कम होने लगा है। स्थानीय लोगों को अब छोटे आंतरिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।


भारी वाहनों को मिलेगा बड़ा फायदा

पुराना पुल उस समय बना था जब ट्रैफिक कम था, इसलिए अब यह भारी वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं रह गया है। पहले बड़े औद्योगिक वाहनों को निकालने के लिए अस्थायी रास्ते बनाने पड़े थे। नया फोरलेन पुल बनने के बाद भारी ट्रकों और औद्योगिक यातायात को बड़ी राहत मिलेगी।


बारिश बनी सबसे बड़ी चुनौती

अभी चंबल नदी पूरी तरह सूखी है, इसलिए यह निर्माण कार्य शुरू करने का सबसे सही समय माना जा रहा है। लेकिन बारिश शुरू होते ही करीब 2 से 3 महीने तक काम प्रभावित हो सकता है, क्योंकि नदी उफान पर आ जाती है। अगर समय रहते नींव का काम पूरा हो गया, तो प्रोजेक्ट की रफ्तार बनी रह सकती है।


आगे क्या? मंजूरी मिलते ही शुरू होगा काम

सड़क विकास निगम ने डायवर्जन प्लान जिला प्रशासन को भेज दिया है। अनुमति मिलते ही पुल तोड़ने और नए ब्रिज का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। अब सबकी नजर इसी पर है कि यह प्रोजेक्ट तय समय में पूरा होता है या लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

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