
धार। मध्यप्रदेश के धार जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। ऑपरेशन प्रहार के तहत पुलिस ने हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए करीब 7 हजार किलो गांजे के पौधे जब्त किए हैं। जब्त फसल की अनुमानित कीमत 25 से 30 करोड़ रुपए बताई जा रही है। मांडव और मनावर क्षेत्र में हुई इस बड़ी कार्रवाई से अवैध मादक पदार्थों की खेती करने वालों में हड़कंप मच गया है।
ड्रोन से जंगलों और पहाड़ियों की निगरानी, फिर पुलिस का बड़ा एक्शन
धार पुलिस ने अवैध गांजे की खेती का पता लगाने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। इसके तहत ड्रोन की मदद से जंगलों, पहाड़ियों और खेतों का हवाई सर्वेक्षण किया गया। दुर्गम इलाकों में ड्रोन से निगरानी कर उन स्थानों को चिन्हित किया गया, जहां अवैध रूप से गांजे की खेती की जा रही थी। ड्रोन से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने संबंधित क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए करीब 7 हजार किलो गांजे के पौधे जब्त किए। पुलिस की इस हाईटेक कार्रवाई को नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।
25 से 30 करोड़ रुपए की गांजे की फसल जब्त
मांडव और मनावर क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई में जब्त गांजे की अनुमानित कीमत करीब 25 से 30 करोड़ रुपए आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा में गांजे की फसल मिलने से अवैध खेती के नेटवर्क को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस अब इस कारोबार से जुड़े लोगों और अन्य संभावित कड़ियों की जांच कर सकती है।
SP सचिन शर्मा के निर्देशन में हुई कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा अंजाम दी गई। धार पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत आधुनिक तकनीक और रणनीतिक निगरानी के जरिए नशे के अवैध कारोबार पर बड़ा प्रहार किया है।
करीब 7 हजार किलो गांजे के पौधों की जब्ती और करोड़ों रुपए की अनुमानित कीमत वाली इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब दुर्गम जंगलों और पहाड़ी इलाकों में छिपकर अवैध खेती करना भी आसान नहीं होगा। ड्रोन की नजर और पुलिस की कार्रवाई ने नशे के कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
भारत में गांजे की खेती अवैध क्यों?
भारत में गांजे (Cannabis) की खेती अवैध है क्योंकि इसका उपयोग नशीले पदार्थ के रूप में किया जा सकता है और इसके उत्पादन, बिक्री एवं वितरण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने विशेष कानून बनाया है। हालांकि, कानून में कुछ विशेष परिस्थितियों में इसकी खेती की अनुमति भी दी गई है।
भारत में गांजे की खेती पर कौन-सा कानून लागू होता है?
भारत में गांजे की खेती को मुख्य रूप से NDPS Act, 1985 (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) के तहत नियंत्रित किया जाता है। इस कानून की धारा 8 के अनुसार, सरकार की अनुमति के बिना गांजे के पौधे की खेती करना प्रतिबंधित है।
गांजे की खेती करने पर क्या सजा हो सकती है?
NDPS Act की धारा 20 के तहत गांजे के पौधे की अवैध खेती करने पर:
10 साल तक की कठोर कारावास की सजा हो सकती है।
1 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
अदालत अपराध की परिस्थितियों के अनुसार सजा निर्धारित करती है।
क्या भारत में गांजे की खेती पूरी तरह प्रतिबंधित है?
नहीं। कानून में कुछ विशेष परिस्थितियों में इसकी अनुमति है। सरकार या अधिकृत अधिकारी की अनुमति से गांजे की खेती इन उद्देश्यों के लिए की जा सकती है:
औषधीय उपयोग (Medical Purpose)
वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific Research)
औद्योगिक उपयोग, जैसे फाइबर और बीज उत्पादन (Industrial Purpose)
उदाहरण के लिए, गांजे के पौधे से मिलने वाले रेशे का इस्तेमाल कपड़ा, रस्सी और अन्य औद्योगिक उत्पाद बनाने में किया जा सकता है।
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