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क्या आप जानते हैं?…नीमच हर्बल मंडी है बेहद खास, यहां फूल, कांटे, पत्ती, छिलके, बीज, छाल, जड़ सभी के मिलते अच्छे दाम

16 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
क्या आप जानते हैं?…नीमच हर्बल मंडी है बेहद खास, यहां फूल, कांटे, पत्ती, छिलके, बीज, छाल, जड़ सभी के मिलते अच्छे दाम
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। प्रदेश में नीमच जिले की हर्बल मंडी अपने आप में अनोखी है। यह औषधीय फसलों के उत्पादक किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। यहां कांटे, फूल, पत्ती, छिलके, बीज, छाल, जड़ सब बिकते हैं। किसानों को विभिन्न औषधीय फसलों के 500 से लेकर 2 लाख रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिल जाते हैं। 


नीमच मंडी की प्रसिद्धि को देखते हुए मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान अपनी फसलें लेकर पहुंच रहे हैं। अप्रैल माह तक मंडी की भरपूर आवक बनी रहती है, जो मई के आखरी सप्ताह तक कम होने लगती है। मुख्यमंडी प्रांगण में 16 शेड हैं। यह एकमात्र मंडी है जहां 40-50 प्रकार के औषधीय पौधों की खरीदी बोली लगाकर होती है। मसाला फसलों की खरीदी करने वाली देश की एक मात्र सबसे बड़ी मंडी है।


मंडी सचिव उमेश बसेडिया शर्मा के मुताबिक मंडी में वर्ष 2024−25 में 64.16 लाख क्विंटल आवक थी, जो कि 2025−26 में बढ़कर 72.40 क्विंटल हो गई। राष्ट्रीय पादप बोर्ड ने साढ़े पांच करोड़ रुपए का अनुदान भी मंडी की अधोसंरचनात्मक गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराया है। मंडी प्रांगण 10.9 हेक्टेयर में फैला है। करीब 1100 लाइसेंसधारी व्यापारी इससे जुडे हैं और 150 से ज्यादा तुलावटी उपलब्ध रहते हैं।


प्रदेश में 46,837 हेक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों की खेती 

मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46,837 हेक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस व अन्य फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग सवा लाख मीट्रिक टन औषधीय फसलों का उत्पादन हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग के कारण किसान इन फसलों की ओर आकर्षित हुए हैं।


औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में होता है उत्पादित 

देश में औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में उत्पादित होता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान देती है। औषधीय पौधों की खेती और संग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। प्रदेश में प्रमुख रूप से अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है।

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