
भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर गिद्धों की गणना की तैयारी तेज हो गई है, लेकिन इस बार तरीका पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा। वन विभाग अब पारंपरिक गिनती के बजाय मोबाइल एप की मदद से गिद्धों का रिकॉर्ड तैयार करेगा। नई तकनीक से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि कर्मचारियों का समय भी बचेगा और डेटा ज्यादा सटीक माना जा रहा है।
शहडोल संभाग में अधिकारियों को दिया गया खास प्रशिक्षण
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ईको सेंटर ताला में आयोजित कार्यशाला में शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और बांधवगढ़ क्षेत्र के 50 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। यहां वन विभाग के अधिकारियों को गिद्धों की पहचान, उनके रहवास और गणना की नई डिजिटल प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया गया। वल्चर कमेटी के सदस्य और मास्टर ट्रेनर दिलशेर खान ने प्रदेश में मिलने वाली गिद्ध प्रजातियों की जानकारी साझा की।
Epicollect5 ऐप से होगी पूरी प्रक्रिया
प्रशिक्षण के दौरान मोहन नागवानी ने Epicollect5 Data मोबाइल एप्लीकेशन के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी। अधिकारियों को बताया गया कि फील्ड में मौजूद कर्मचारी मौके पर ही गिद्धों की फोटो लेकर ऐप में जरूरी जानकारी दर्ज करेंगे। इससे डेटा तुरंत अपलोड होगा और पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बन जाएगी।
20 से 22 फरवरी के बीच होगा प्रदेशव्यापी सर्वे
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि प्रदेश में 20 फरवरी से 22 फरवरी तक शीतकालीन गिद्ध गणना की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि मैदानी अमले को भी ऐप आधारित सिस्टम की पूरी जानकारी दी जाए ताकि सर्वे के दौरान कोई परेशानी न हो।
कर्मचारियों को दी गई डिजिटल फील्ड ट्रेनिंग
वर्कशॉप में एसडीओ, रेंजर और वन कर्मचारियों को ऐप ऑपरेट करने, डेटा अपलोड करने और फोटो के जरिए रिकॉर्ड तैयार करने का प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि अब गणना के दौरान हर एंट्री डिजिटल रूप से दर्ज होगी, जिससे गलतियों की संभावना कम होगी।
बांधवगढ़ में मिलती हैं चार प्रमुख गिद्ध प्रजातियां
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भारतीय गिद्ध (लॉन्ग बिल्ड वल्चर), सफेद पूंछ वाला गिद्ध (व्हाइट बेक्ड वल्चर), राज गिद्ध (रेड हेडेड वल्चर) और इजिप्शियन वल्चर देखे जाते हैं। इस बार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि हिमालयन ग्रिफन, यूरेशियन ग्रिफन और सिनेरियस गिद्ध जैसी अन्य प्रजातियां भी नजर आ सकती हैं।
पर्यावरण संतुलन में गिद्धों की अहम भूमिका
डॉ. अनुपम सहाय के मुताबिक गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी माने जाते हैं क्योंकि वे मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं। इस बार गिनती के लिए करीब 150 कर्मचारी मैदान में रहेंगे, जबकि लगभग 100 अधिकारी निगरानी करेंगे। कुल मिलाकर करीब 250 लोगों की टीम इस डिजिटल सर्वे को सफल बनाने में जुटेगी।
डिजिटल तकनीक से आसान होगी वन्यजीव मॉनिटरिंग
वन विभाग का मानना है कि मोबाइल ऐप आधारित गणना से भविष्य में वन्यजीवों की निगरानी और संरक्षण योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा। नई तकनीक के इस्तेमाल से गिद्धों की सटीक संख्या सामने आने की उम्मीद है, जो संरक्षण रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
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