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दिवाली पर घर जाना हुआ महंगा! भोपाल से रीवा तक बस का किराया फ्लाइट से ज्यादा, 10 हजार तक पहुंचा टिकट

02 नव, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
दिवाली पर घर जाना हुआ महंगा! भोपाल से रीवा तक बस का किराया फ्लाइट से ज्यादा, 10 हजार तक पहुंचा टिकट
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। दिवाली पर परिवार के साथ त्योहार मनाने घर लौटने की तैयारी कर रहे लोगों को इस बार सफर के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। मध्य प्रदेश में निजी बसों के टिकट इतने महंगे हो गए हैं कि कई रूट पर हवाई यात्रा करना बस के मुकाबले सस्ता पड़ रहा है।


भोपाल से रीवा के लिए फ्लाइट का टिकट करीब 3,700 रुपये में मिल रहा है, जबकि स्लीपर बस का किराया 5,000 रुपये तक पहुंच गया है। भोपाल-ग्वालियर रूट पर कुछ बसों के टिकट 10 हजार रुपये तक दिखाई दे रहे हैं। यात्रियों की बढ़ती मांग के बीच निजी बस ऑपरेटरों की किराया नीति पर सवाल उठने लगे हैं।


भोपाल से अहमदाबाद तक बस का किराया 7 हजार रुपये

त्योहारी सीजन में ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म पर लंबी दूरी की बसों के किराए में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। कुछ तारीखों में यात्रियों को हवाई सफर के मुकाबले बस यात्रा के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।


प्रमुख रूट पर सामने आए किराए के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • भोपाल-रीवा: फ्लाइट करीब 3,700 रुपये, स्लीपर बस 5,000 रुपये तक।

  • भोपाल-अहमदाबाद: फ्लाइट का टिकट 5,500 से 6,500 रुपये, जबकि BR Travels की लग्जरी बस का किराया 7,000 रुपये तक।

  • भोपाल-ग्वालियर: जय भवानी ट्रैवल्स की बस का टिकट 10,000 रुपये तक।

  • भोपाल-जबलपुर और रायपुर: सामान्य दिनों के मुकाबले किराए में बढ़ोतरी।


भोपाल से दूसरे शहरों और राज्यों के लिए चलने वाली बसों में सामान्य दिनों की तुलना में करीब 25 प्रतिशत तक किराया बढ़ा है। कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चुनिंदा तारीखों के टिकट कई गुना महंगे दिखाई दे रहे हैं।


यात्रियों की संख्या तीन गुना, फ्लेक्सी फेयर से बढ़ रहे दाम

दिवाली के दौरान भोपाल से अलग-अलग रूट पर जाने वाले यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले करीब तीन गुना हो गई है। नौकरी और पढ़ाई के सिलसिले में दूसरे शहरों में रहने वाले लोग परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए घर पहुंचना चाहते हैं। सीटों की मांग बढ़ने के साथ निजी बसों में फ्लेक्सी फेयर सिस्टम के जरिए टिकटों की कीमत बदल रही है। इस व्यवस्था में यात्रियों की संख्या और सीटों की मांग के आधार पर किराया घटाया या बढ़ाया जाता है। यह प्रणाली विमानन कंपनियों में भी इस्तेमाल होती है। यात्रियों के पास सीमित विकल्प होने के कारण उन्हें महंगे टिकट खरीदने पड़ रहे हैं।


छतरपुर से दिल्ली का किराया 4 गुना तक बढ़ा

छतरपुर में भी दिवाली के दौरान बस टिकटों की कीमतों में भारी अंतर सामने आया है। ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म पर 7 नवंबर के लिए छतरपुर से दिल्ली जाने वाली बसों का किराया 3,109 से 3,599 रुपये तक पहुंच गया है। दिल्ली से छतरपुर आने वाली बस का स्लीपर टिकट 4,089 रुपये तक दिख रहा है। सामान्य दिनों में इसी सफर का किराया करीब 1,050 रुपये रहता है। यानी यात्रियों को अब सामान्य कीमत से तीन से चार गुना तक भुगतान करना पड़ सकता है।


परिवहन विभाग ने क्या कहा?

छतरपुर में परिवहन विभाग की ओर से बस किराए में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई है। RTO प्रभारी मधु सिंह ने बताया कि बसों में किराया सूची चस्पा करने के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी बस संचालक द्वारा निर्धारित किराए से अधिक वसूली की पुष्टि होती है तो संबंधित ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


इंदौर से मुंबई-पुणे जाने का किराया 7,500 रुपये तक

इंदौर में भी दिवाली से पहले बस यात्रियों को महंगी टिकटों का सामना करना पड़ रहा है। 8 नवंबर को दिवाली से पहले मुंबई और पुणे रूट पर AC बसों का किराया 6,500 से 7,500 रुपये तक पहुंच गया है। सामान्य दिनों में इंदौर से मुंबई और पुणे रूट पर नॉन-AC बस का किराया 1,000 से 1,300 रुपये रहता है, जो दिवाली के दौरान बढ़कर 3,500 से 5,000 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह AC बस का सामान्य किराया 1,300 से 1,800 रुपये होता है, लेकिन त्योहार के समय यात्रियों को इसके लिए 5,500 से 7,500 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।


5 से 7 नवंबर के बीच मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद से इंदौर आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इन शहरों में रोजगार के लिए बड़ी संख्या में इंदौर के लोग रहते हैं। त्योहार से पहले इंदौर से इन शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से वापसी और आगे की यात्रा, दोनों तरफ सीटों की मांग पर दबाव है।


बसों का किराया ऑपरेटर तय करते हैं, एसोसिएशन अध्यक्ष ने बताई वजह

प्राइवेट बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जय कुमार जैन ने किराए में अंतर को लेकर अपनी बात रखी है। उनके मुताबिक, अलग-अलग परमिट वाली बसों में किराया तय करने का तरीका भी अलग होता है। जैन ने बताया कि स्टेट कैरिज बसों के संचालक निर्धारित किराया लेते हैं, जबकि ऑल परमिट वाली बसों में ऑपरेटर प्रति ट्रिप के हिसाब से किराया तय करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म अपने चार्ज जोड़ते हैं, जिससे यात्रियों को टिकट की अंतिम कीमत ज्यादा चुकानी पड़ती है।

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