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डॉग बाइट भोपाल: रोज 81 लोग शिकार, ₹8.56 करोड़ खर्च के बाद भी नहीं थमा आवारा कुत्तों का आतंक

21 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
डॉग बाइट भोपाल: रोज 81 लोग शिकार, ₹8.56 करोड़ खर्च के बाद भी नहीं थमा आवारा कुत्तों का आतंक
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राजधानी भोपाल में आवारा कुत्तों का खतरा अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। शहर में हर दिन औसतन 81 लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि नगर निगम पिछले पांच साल में नसबंदी और वैक्सीनेशन पर ₹8.56 करोड़ खर्च कर चुका है, लेकिन हमलों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। जेपी और हमीदिया अस्पताल में हर दिन बच्चे और बुजुर्ग डॉग बाइट के बाद इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। गर्मी बढ़ने के साथ अब खतरा और ज्यादा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


भोपाल में सवा लाख आवारा कुत्ते, लेकिन एक भी स्थायी शेल्टर नहीं

नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक भोपाल में करीब 1.20 लाख आवारा कुत्ते मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन शहर में अभी तक एक भी स्थायी डॉग शेल्टर नहीं बन पाया है। स्थिति यह है कि निगम को हर दिन करीब 15 शिकायतें मिल रही हैं। कई इलाकों में लोगों का पैदल निकलना तक मुश्किल हो गया है। आगे जानिए किन क्षेत्रों में खतरा सबसे ज्यादा है।


इन इलाकों में सबसे ज्यादा डॉग बाइट का खतरा

शहर के अशोका गार्डन, अयोध्या बायपास, पिपलानी, कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद, करोंद, छोला, बैरागढ़ और लालघाटी-हलालपुर रोड जैसे इलाकों में रात के समय कुत्तों के झुंड ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी और न्यू मार्केट के आसपास भी हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं। कई जगह फुटपाथों पर कुत्तों के डेरों की वजह से लोगों को रास्ता बदलना पड़ रहा है। अब सवाल यह है कि करोड़ों खर्च के बाद भी हालात क्यों नहीं सुधरे?


600 कुत्तों की क्षमता, शहर में 1.20 लाख स्ट्रे डॉग

नगर निगम के पास फिलहाल अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा में सिर्फ तीन एबीसी सेंटर हैं। इनकी कुल क्षमता केवल 600 कुत्तों की बताई गई है। इन केंद्रों पर रोजाना सिर्फ 20 से 25 कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन हो पा रहा है। यानी शहर में मौजूद आवारा कुत्तों की तुलना में यह व्यवस्था बेहद छोटी साबित हो रही है। यही वजह है कि शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।


5 साल में 81 हजार कुत्तों की नसबंदी का दावा

नगर निगम का दावा है कि पिछले पांच साल में 81,207 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया। इसके लिए कुल ₹8.56 करोड़ खर्च किए गए। इसके बावजूद डॉग बाइट के मामलों में कमी नहीं आई। लोगों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर निगरानी और नियंत्रण की व्यवस्था कमजोर है। अब पूरे मध्यप्रदेश के आंकड़े भी डराने लगे हैं।


इंदौर में रोज 146 डॉग बाइट केस

सिर्फ भोपाल ही नहीं, इंदौर में भी हालात गंभीर हैं। अप्रैल के पहले 24 दिनों में वहां 3,493 डॉग बाइट केस सामने आए। यानी हर दिन औसतन 146 मामले दर्ज हुए। जनवरी में 5,198, मार्च में 5,109 और दिसंबर में 5,471 केस रिकॉर्ड किए गए थे। लगातार बढ़ते आंकड़े प्रशासन की चिंता बढ़ा रहे हैं।


मध्यप्रदेश में 10 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 2024 के आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में 10.09 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इनमें से 6 लाख से अधिक भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में मौजूद हैं। कई इलाकों में बच्चे अब बाहर खेलने से डरने लगे हैं। लोगों का कहना है कि रात में अकेले निकलना जोखिम भरा हो गया है।


3 साल में 3.39 लाख डॉग बाइट केस, 9 मौतें

केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2022 से जनवरी 2025 तक मध्यप्रदेश में करीब 3.39 लाख डॉग बाइट मामले दर्ज हुए।


2022: 66,018 केस

2023: 1,13,499 केस

2024: 1,42,948 केस

जनवरी 2025: 16,710 केस


इसी अवधि में रेबीज से कम से कम 9 लोगों की मौत भी हुई। देशभर में बढ़ते मामलों के बीच मध्यप्रदेश अब सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में गिना जा रहा है।


गर्मी में क्यों बढ़ जाते हैं कुत्तों के हमले?

पशु चिकित्सक एसआर नागर के अनुसार गर्मियों में कुत्तों का व्यवहार ज्यादा आक्रामक हो सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कुत्तों के शरीर में इंसानों की तरह स्वेट ग्लैंड नहीं होते, इसलिए वे शरीर का तापमान आसानी से नियंत्रित नहीं कर पाते। गर्मी, भूख और पानी की कमी उन्हें चिड़चिड़ा बना देती है। ऐसे में अगर उन्हें खतरा महसूस हो, तो वे हमला कर सकते हैं।


विशेषज्ञों ने अप्रैल से जून के बीच डॉग बाइट मामलों में और तेजी आने की आशंका जताई है। सलाह दी गई है कि कुत्तों को पर्याप्त पानी और छांव मिले, ताकि उनका व्यवहार शांत बना रहे।

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