
भोपाल। मध्यप्रदेश को ‘ड्रोन हब’ बनाने के लिए सरकार ने नई नीति के तहत निवेशकों और युवाओं के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं, मगर जमीन पर ड्रोन रजिस्ट्रेशन की रफ्तार अभी भी धीमी दिखाई दे रही है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश के कई राज्यों की तुलना में एमपी काफी पीछे है और यहां रजिस्टर्ड ड्रोन की संख्या सिर्फ 480 तक सीमित है।
भारी सब्सिडी के बावजूद क्यों नहीं बढ़ रहा रुझान?
राज्य सरकार ने ‘एमपी ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025’ में ड्रोन निर्माण करने वाली कंपनियों को 40% तक कैपिटल सब्सिडी (अधिकतम 30 करोड़ रुपए) और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए 2 करोड़ रुपए तक की सहायता का प्रावधान किया है। बावजूद इसके निवेश और पंजीकरण की गति उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाई। आंकड़ों के अनुसार ड्रोन रजिस्ट्रेशन में मध्यप्रदेश देशभर में 13वें स्थान पर है।
टॉप राज्यों से काफी पीछे मध्यप्रदेश
देश में कुल 38,475 ड्रोन रजिस्टर्ड बताए जा रहे हैं। इसमें महाराष्ट्र 8,210 ड्रोन के साथ पहले स्थान पर है, जबकि तमिलनाडु (5,878) और तेलंगाना (3,657) भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसके मुकाबले मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 2% से भी कम है, जो राज्य की महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल खड़े करती है।
किसानों और युवाओं के लिए बड़े वादे
सरकार का दावा है कि ड्रोन नीति से कृषि क्षेत्र में नई तकनीक पहुंचेगी और करीब 8,000 रोजगार के अवसर बनेंगे। ‘नमो ड्रोन दीदी’ और ‘सीखो-कमाओ योजना’ के तहत युवाओं को ट्रेनिंग और स्टाइपेंड देने की व्यवस्था की गई है। ट्रेनिंग लेने वालों को हर महीने 8,000 रुपये तक की सहायता भी प्रस्तावित है।
रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस प्रक्रिया बनी बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन खरीदने और उपयोग करने के लिए जरूरी यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) और रिमोट पायलट लाइसेंस को लेकर लोगों में पर्याप्त जागरूकता नहीं है। यही वजह है कि कई लोग ड्रोन इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन आधिकारिक रजिस्ट्रेशन से दूरी बना रहे हैं।
ड्रोन पॉलिसी 2025 की प्रमुख बातें
1. नए निवेश पर 40% तक सब्सिडी और लीज रेंट पर 25% तक की छूट।
2. घरेलू पेटेंट के लिए 5 लाख और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए 10 लाख रुपये तक की मदद।
3. ड्रोन ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं को स्टाइपेंड और स्किल डेवलपमेंट पर जोर।
छोटे राज्यों से आगे, लेकिन बड़े राज्यों से अभी लंबा सफर
जहां लद्दाख, मिजोरम और नागालैंड जैसे छोटे राज्यों में ड्रोन की संख्या बेहद कम है, वहीं हरियाणा, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्य तेज गति से आगे बढ़ चुके हैं। ऐसे में सवाल यही है कि भारी प्रोत्साहन के बावजूद मध्यप्रदेश ड्रोन सेक्टर में अपेक्षित उड़ान कब भर पाएगा।
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