
भोपाल। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने दूरदर्शी आर्थिक नीतियों के साथ संतुलित और समावेशी विकास का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,69,050 रुपए हो गई है।
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के मुताबिक मध्यप्रदेश योजनाबद्ध, संतुलित और परिणामोन्मुख विकास पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। कृषि से उद्योग, सेवा से सामाजिक क्षेत्र और वित्तीय अनुशासन से सुशासन तक प्रत्येक क्षेत्र में निरंतर प्रगति हुई है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश को विश्व की मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने मध्यप्रदेश पूरी क्षमता के साथ तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने आर्थिक समृद्धि के जो कदम उठाये हैं, उनके परिणाम मिलना शुरू हो गए हैं।
उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने मंगलवार को विधानसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पर कहा कि वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद प्रचलित भाव पर 16,69,750 करोड़ रुपए आंका गया है, जो वर्ष 2024-25 के 15,02,428 करोड़ रुपए की तुलना में 11.14 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। स्थिर (2011-12) भाव पर जीएसडीपी 7,81,911 करोड़ रुपए अनुमानित है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दिखाता है। आर्थिक विस्तार केवल मूल्य वृद्धि का परिणाम नहीं, वास्तविक उत्पादन और गतिविधियों में वृद्धि का परिणाम है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पर उपमुख्यमंत्री ने ये भी कहा…
. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2011-12 में प्रचलित भाव पर 38,497 रुपए रही प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,69,050 रुपए हो गई है। स्थिर (2011-12) भाव पर यही आय 76,971 रुपए तक पहुंच गई है। यह आय स्तर में सुधार का संकेत हैं, जो जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक परिवर्तन को दिखाता है।
. जगदीश देवड़ा ने वर्ष 2025-26 में प्रचलित भाव पर सकल राज्य मूल्य वर्धन में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत रहा। स्थिर भाव पर यह संरचना क्रमशः 33.54 प्रतिशत, 26.18 प्रतिशत और 40.28 प्रतिशत रही।
. प्राथमिक क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 6,79,817 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वर्ष के 6,33,532 करोड़ रुपए की तुलना में 7.31 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इस क्षेत्र में फसलें 30.17 प्रतिशत भागीदारी के साथ प्रमुख घटक रहीं। पशुधन, वानिकी, मत्स्य एवं जलीय कृषि तथा खनन एवं उत्खनन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
. कृषि एवं ग्रामीण विकास के मोर्चे पर वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत तथा खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। उद्यानिकी क्षेत्रफल 28.39 लाख हेक्टेयर रहा और दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुंचा। गांवों की समृद्धि के लिए 72,975 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण और 40.82 लाख ग्रामीण आवासों के बनने से ग्रामीण आधार को मजबूती मिली है।
. द्वितीयक क्षेत्र का कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन वर्ष 2025-26 में 3,12,350 करोड़ रुपए रहा, जो 9.93 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। निर्माण, विनिर्माण तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाओं का प्रमुख योगदान रहा। औद्योगिक विकास के अंतर्गत 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिससे ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश और लगभग 1.7 लाख रोजगार अवसरों का मार्ग प्रशस्त हुआ।
. वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सहायता 2,162 करोड़ रुपये रही। राज्य में 1,723 स्टार्टअप और 103 इनक्यूबेशन केंद्र सक्रिय हैं, जबकि सीएसआर व्यय 600.47 करोड़ रूपये दर्ज किया गया।
. उप मुख्यमंत्री ने कहा कि तृतीयक क्षेत्र ने सर्वाधिक तेज गति से वृद्धि की है। वर्ष 2025-26 में इसका कुल GSVA 5,85,588 करोड़ रुपए रहा, जो 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट, वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट, लोक प्रशासन तथा अन्य सेवाओं का प्रमुख योगदान रहा है।
. पर्यटन क्षेत्र में 13.18 करोड़ पर्यटकों का आना यह बताता है कि इस क्षेत्र में गति आई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में 618 करोड़ रुपए राजस्व आधिक्य अनुमानित कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि तथा ऋण-GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहना यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश के वित्तीय अनुशासन में निरंतर सुधार हुआ है।
. नगरीय विकास के अंतर्गत अमृत 2.0 में 4,065 करोड़ रुपये का आवंटन और 1,134 परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 8.75 लाख आवास पूर्ण हुए तथा स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राज्य को 8 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए।
. स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल व्यय 34,112 करोड़ रुपये (GSDP का 3 प्रतिशत) रहा। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए और मातृ मृत्यु दर 379 (2001-03) से घटकर 142 (2021-23) प्रति लाख जीवित जन्म हो गई।
. शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कुल बजट का 10.37 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य रही और कक्षा 6-8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई। 45,668 विद्यार्थियों को 500 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई। तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई है।
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