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ओंकारेश्वर में आज से ‘एकात्म पर्व’ का शुभारंभ: CM मोहन यादव करेंगे उद्घाटन, 5 दिन चलेगा सांस्कृतिक-आध्यात्मिक महाकुंभ

17 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
ओंकारेश्वर में आज से ‘एकात्म पर्व’ का शुभारंभ: CM मोहन यादव करेंगे उद्घाटन, 5 दिन चलेगा सांस्कृतिक-आध्यात्मिक महाकुंभ
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आज से एक बड़े सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजन की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह 10 बजे ‘एकात्म पर्व’ का शुभारंभ करेंगे। यह आयोजन आने वाले 5 दिनों तक देश-विदेश के विद्वानों और संतों को एक मंच पर लाएगा।


ओंकारेश्वर बना आध्यात्मिक केंद्र

ओंकारेश्वर में आयोजित यह महोत्सव ‘एकात्म धाम’ में हो रहा है, जो आदि गुरु आदि शंकराचार्य की दीक्षा स्थली के रूप में भी जाना जाता है। मांधाता पर्वत की कंदराओं में बसे इस स्थल पर आयोजन का महत्व और भी बढ़ जाता है—जहां दर्शन और परंपरा का गहरा संगम देखने को मिलेगा।


5 दिन तक चलेगा वैचारिक और सांस्कृतिक मंथन

यह पांच दिवसीय महाकुंभ दार्शनिक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा पर केंद्रित रहेगा। हर दिन अलग-अलग विषयों पर चर्चा, संवाद और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


देश-विदेश के संत और विद्वान होंगे शामिल

इस पर्व में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी संत, मनीषी और विद्वान शामिल हो रहे हैं। उनका उद्देश्य एक ही है—एकात्मता का वैश्विक संदेश देना और भारतीय दर्शन को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना।


CM करेंगे प्रदर्शनी और अनुष्ठान का शुभारंभ

मुख्यमंत्री मोहन यादव इस दौरान ‘अद्वैत लोक’ और ‘अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी’ का लोकार्पण भी करेंगे। साथ ही वे वैदिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे, जिससे आयोजन का आध्यात्मिक स्वरूप और गहरा होगा।


शंकराचार्य का मिलेगा सान्निध्य

इस महोत्सव में द्वारका पीठ के जगद्गुरु स्वामी सदानंद सरस्वती का पावन सान्निध्य भी प्राप्त होगा। उनकी उपस्थिति आयोजन को और अधिक गरिमा प्रदान करेगी।


700 युवा बनेंगे ‘शंकरदूत’

महोत्सव के दौरान 21 अप्रैल को विशेष दीक्षा समारोह आयोजित होगा। इसमें 700 से अधिक युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में संकल्प लेंगे। यह पहल युवाओं को भारतीय संस्कृति और दर्शन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


राष्ट्र को जोड़ने का प्रयास

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह पर्व देश को सांस्कृतिक और वैचारिक रूप से एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है। आने वाले दिनों में यह आयोजन न सिर्फ मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश में एक नई सांस्कृतिक चेतना को जन्म दे सकता है।

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