
भोपाल। प्रदेश में बिजली की मांग में अचानक बढ़ोतरी और उत्पादन इकाइयों में तकनीकी समस्याओं के चलते बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। पिछले वर्ष 14 अक्टूबर को बिजली की अधिकतम मांग 11,874 मेगावाट थी, जो इस वर्ष बढ़कर 17,124 मेगावाट हो गई है। यानी मांग में करीब 5,250 मेगावाट की वृद्धि हुई है।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के अनुसार, अल्पवृष्टि और धान की सिंचाई व पलेवा के लिए कृषि क्षेत्र में बिजली की बढ़ती मांग इसका प्रमुख कारण है। हालांकि, बंद उत्पादन इकाइयों को दोबारा चालू करने और अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार को आगामी सप्ताह तक 3 से 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने की उम्मीद है।
बिजली आपूर्ति में 38.6 प्रतिशत की वृद्धि
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 14 अक्टूबर 2026 को प्रदेश में पिछले वर्ष की तुलना में 38.6 प्रतिशत अधिक बिजली की आपूर्ति की गई। 14 अक्टूबर 2025 को 2,423 लाख यूनिट बिजली दी गई थी, जबकि इस वर्ष इसी तारीख को 3,310 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति हुई। कृषि क्षेत्र में भी मांग तेजी से बढ़ी है। पिछले वर्ष 1 अक्टूबर को कृषि कार्यों के लिए बिजली की मांग 1,752 मेगावाट थी, जो इस वर्ष 1 अक्टूबर को बढ़कर 3,701 मेगावाट हो गई।
जल और ताप विद्युत उत्पादन प्रभावित
कम बारिश के कारण गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और सरदार सरोवर परियोजनाओं से जल विद्युत उत्पादन में करीब 1,500 मेगावाट की कमी आई है। वहीं, देशभर में कोयले की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण ताप विद्युत इकाइयों के बंद होने से उत्पादन प्रभावित हुआ है। प्रदेश के ताप विद्युत गृहों में तकनीकी खराबियों के चलते लगभग 1,000 मेगावाट उत्पादन प्रभावित होने की जानकारी भी ऊर्जा मंत्री ने दी।
बिजली एक्सचेंज में भी उपलब्धता का संकट
ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2026 को इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में पीक आवर्स के दौरान बिजली खरीदने के लिए करीब 70 हजार मेगावाट की मांग थी, जबकि बिक्री के लिए लगभग 500 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी। इसकी दर भी करीब 10 रुपये प्रति यूनिट थी। बिजली की सीमित उपलब्धता के बीच प्रदेश पीक आवर्स में उत्तर प्रदेश से 500 मेगावाट बिजली ले रहा है। इसके अलावा बिजली एक्सचेंज से भी बिजली खरीदने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बंद इकाइयों से जल्द बढ़ेगी उपलब्धता
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि खंडवा और बीरसिंहपुर की इकाइयों में रखरखाव के बाद उत्पादन दोबारा शुरू हो गया है। इससे करीब 1,000 मेगावाट बिजली की उपलब्धता बढ़ी है। 20 अक्टूबर तक लैंको पावर और एनटीपीसी गाडरवारा की इकाइयों से भी बिजली मिलने की उम्मीद है। इससे लगभग 600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध हो सकेगी। इसके अलावा तकनीकी कारणों से बंद करीब 1,200 मेगावाट क्षमता की इकाइयों को भी एक से दो दिन में शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
16 अक्टूबर से 500 मेगावाट बैंकिंग बिजली
प्रदेश में 16 अक्टूबर से 500 मेगावाट बैंकिंग बिजली भी उपलब्ध होने लगेगी। इन व्यवस्थाओं के चलते आगामी सप्ताह तक 3 से 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने की उम्मीद जताई गई है। ऊर्जा मंत्री के अनुसार, इससे वर्तमान में बनी बिजली की कमी दूर होने की संभावना है।
रबी सीजन के लिए भी की गई अग्रिम व्यवस्था
रबी सीजन में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी अग्रिम बैंकिंग की गई है। पिछले वर्ष 3,600 मिलियन यूनिट की तुलना में इस वर्ष करीब 225 मिलियन यूनिट अतिरिक्त बिजली की अग्रिम बैंकिंग की गई है। इसके तहत 1 नवंबर 2026 से 10 मार्च 2027 तक बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। ऊर्जा विभाग का कहना है कि इन उपायों से कृषि कार्यों के दौरान बिजली की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
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