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कारखाने बंद पर दौड़ रहा बिजली बिल का मीटर, एमपी की हजारों एमएसएमई इकाइयां जूझ रही संकट से

20 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
कारखाने बंद पर दौड़ रहा बिजली बिल का मीटर, एमपी की हजारों एमएसएमई इकाइयां जूझ रही संकट से
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। मध्य प्रदेश में बिजली कंपनियों के फिक्स्ड चार्ज और मिनिमम चार्ज ने छोटे-बड़े उद्योगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्पादन बंद रहने के बावजूद उद्योगों को भारी-भरकम बिजली बिल चुकाना पड़ रहा है। औद्योगिक संगठनों के मुताबिक प्रदेश में 3,000 से ज्यादा पंजीकृत एमएसएमई इकाइयां वित्तीय संकट से जूझ रही हैं।


मामला खासतौर पर उन उद्योगों का है, जिनमें बाजार में मंदी या ऑर्डर नहीं मिलने की वजह से उत्पादन कम या पूरी तरह बंद है। इसके बावजूद बिजली कनेक्शन की स्वीकृत क्षमता और निर्धारित न्यूनतम खपत के आधार पर बिल में फिक्स्ड व मिनिमम चार्ज जुड़ रहा है।


100 केवीए कनेक्शन पर 77,400 रुपए का बिल

आंकड़ों की बात करें तो 100 केवीए के कनेक्शन पर करीब 39,900 रुपए फिक्स्ड चार्ज और 37,500 रुपए मिनिमम चार्ज जुड़ने से, शून्य खपत की स्थिति में भी बिल लगभग 77,400 रुपए तक पहुंच जाता है। वहीं, 500 केवीए कनेक्शन पर फिक्स्ड चार्ज करीब 3.15 लाख रुपए और मिनिमम चार्ज करीब 3.73 लाख रुपए बताया गया है। शून्य खपत पर भी बिल करीब 6.88 लाख रुपए तक पहुंच जाता है।


उद्योग प्रतिनिधियों ने उठाई यह आपत्ति

उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि जब उत्पादन ही नहीं हो रहा तो वास्तविक खपत के मुकाबले इतना बड़ा न्यूनतम शुल्क लगना बीमार और संकटग्रस्त इकाइयों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। भोपाल-मंडीदीप और ग्वालियर-मालनपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में इकाइयां संकट की श्रेणी में पहुंच चुकी हैं।


सरकार से मिनिमम चार्ज खत्म करने की मांग

औद्योगिक संगठनों ने सरकार से मिनिमम चार्ज की व्यवस्था खत्म करने और बिजली शुल्क को वास्तविक खपत से जोड़ने की मांग की है। उनका तर्क है कि इससे बंद या कम उत्पादन वाली इकाइयों को राहत मिलेगी और उद्योगों को दोबारा शुरू करने में मदद मिलेगी।


आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी में उद्योगपति 

मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में आगामी टैरिफ निर्धारण से जुड़े प्रस्तावों को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। उद्योग जगत का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था को बदला नहीं गया तो बिजली बिल का यह बोझ कई एमएसएमई इकाइयों के लिए कारोबार बंद करने की वजह बन सकता है।

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