
भोपाल। मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब फसल की ग्रोथ के लिए जरूरी यूरिया, फास्फोरस बेस्ड और अन्य खाद लेने के लिए लंबी लाइनें नहीं लगानी होंगी, न ही ट्रैक्टर-ट्रॉली का महंगा किराया देना पड़ेगा। राज्य सरकार ने ऐसा कदम उठाया है जो खेती-किसानी की तस्वीर बदल सकता है—अब खाद की होम डिलीवरी सीधे किसानों के गांव और घर तक की जाएगी।
तीन जिलों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
राज्य सरकार ई-टोकन खाद वितरण सिस्टम में नई सुविधा जोड़ने जा रही है। अब किसान बुकिंग के दौरान ही होम डिलीवरी ऑप्शन चुन सकेंगे।
➡️ होम डिलीवरी के लिए न्यूनतम किराया लिया जाएगा
➡️ सुविधा केवल डबल लॉक केंद्र से 5 किमी के दायरे में उपलब्ध होगी
➡️ शुरुआत विदिशा, जबलपुर और शाजापुर से होगी
➡️ सफल होने पर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा
सरकार का मानना है कि इस सुविधा से किसानों को
✓ महंगे ट्रांसपोर्ट
✓ खाद केंद्रों की भीड़
✓ टाइम और मेहनत
से बड़ी राहत मिलेगी।
विदिशा चुना गया पहला जिला – कृषि मंत्री का संसदीय क्षेत्र
पायलट प्रोजेक्ट जिन तीन जिलों से शुरू होगा, उनमें विदिशा खास है। यह केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र है, इसलिए योजना की शुरुआत यहीं से की जा रही है। विदिशा जिला कृषि विभाग के उप संचालक के. एस. खपेड़िया ने बताया, “एक केंद्र के अंतर्गत आने वाले आठ गांव चिन्हित कर भेजे जा चुके हैं। यह योजना जल्द ही शुरू की जा सकती है।” यानी विदिशा के किसानों को सबसे पहले घर-घर खाद पहुंचने का लाभ मिलेगा।
क्यों जरूरी थी यह सुविधा?
खाद केंद्रों पर बड़ी भीड़
किसानों को अपने वाहन से खाद ढोने की मजबूरी
किराये पर वाहन लेने होने वाला अतिरिक्त खर्च
समय और ऊर्जा दोनों की खपत
नई होम डिलीवरी व्यवस्था इन सभी समस्याओं को खत्म करेगी।
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