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मोहन भागवत के तीन बच्चों वाले बयान के बाद मध्यप्रदेश में 2 बच्चे नीति हटाने की चर्चा तेज

25 नव, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मोहन भागवत के तीन बच्चों वाले बयान के बाद मध्यप्रदेश में 2 बच्चे नीति हटाने की चर्चा तेज

मोहन भागवत के तीन बच्चों वाले बयान के बाद मध्यप्रदेश में 2 बच्चे नीति हटाने की चर्चा तेज

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। “बच्चे तीन भी अच्छे”… संघ प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान मध्यप्रदेश के उन 400 से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है, जिनकी नौकरी तीसरी संतान होने के चलते खतरे में थी। कई तो विभागीय जांच झेल रहे हैं, और कुछ को विरोधी लगातार धमका भी रहे हैं। अब उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार Two Child Law में बदलाव कर सकती है और तीसरी संतान वाले सरकारी सेवकों को राहत मिल सकती है।


सरकार तक पहुँची गुहार

अफसर-कर्मचारी भागवत के बयान के बाद सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि 2 बच्चों की बाध्यता को हटाया जाए।

 सूत्रों के अनुसार, इस आधार पर एक प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, और जल्द ही बड़े स्तर पर समीक्षा संभव है।

 यदि नियम हटा, तो 12 लाख से अधिक सरकारी और संविदाकर्मियों को भी भविष्य में किसी कानूनी पेंच का डर नहीं रहेगा।


क्या कहा था मोहन भागवत ने?

संघ प्रमुख ने 28 अगस्त को बयान दिया था, “देश की जनसंख्या नीति 2:1 बच्चों की है। हर परिवार में 3 बच्चे होने चाहिए।” भागवत ने यह भी कहा कि जनसंख्या संतुलन देश के लिए जरूरी है।


दिग्विजय सरकार ने लागू किया था Two Child Law

मध्यप्रदेश में दो बच्चों की नीति की शुरुआत 2001 में दिग्विजय सिंह (कांग्रेस) की सरकार ने की थी। एमपी सेवा भर्ती सामान्य शर्त नियम, 1961 में संशोधन कर यह प्रावधान जोड़ा गया कि सरकारी नौकरी में दो से अधिक बच्चे होने पर प्रतिबंध रहेगा। इस नियम ने कई कर्मचारियों को नौकरी के संकट में डाल दिया। कई ऐसे मामले सामने आए जहाँ कर्मचारियों को इस कानून की जानकारी ही नहीं थी। एक सरकारी कर्मचारी ने बताया कि वह 2005 में सेवा में आया, पर 2001 के नियम की जानकारी न होने के कारण जब तक उसे पता चला, तब तक वह तीन बच्चों का पिता बन चुका था। विरोधियों ने शिकायतें कर दीं और विभागीय जांच शुरू हो गई। कई कर्मचारी इसलिए भी परेशान हैं कि दो संतानें रिकॉर्ड में दर्ज थी, लेकिन बाद में एक की मृत्यु हो गई। ऐसी स्थिति में वे दूसरी संतान चाहते हैं, लेकिन कानूनी अड़चन उन्हें रोक रही है। खासकर कोविड काल में ऐसे कई प्रकरण सामने आए, फिर भी किसी तरह की छूट नहीं दी गई।


वहीं दूसरी ओर, मध्यप्रदेश के शहरी क्षेत्रों में विदेशों की तरह ‘एक संतान’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती जरूरतों, प्रतिस्पर्धा और महंगाई के चलते कई दंपत्ति केवल एक ही बच्चे का पालन-पोषण करना बेहतर मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जापान और इटली जैसे देशों की तरह भारत में भी, खासकर मध्यप्रदेश में, जनसंख्या घटने का खतरा भविष्य में सामने आ सकता है।

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