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गैस संकट में एजेंसियों का खेल! 80 हजार उपभोक्ताओं से 35 रुपए वसूले, 28 लाख कमाए, जांच शुरू

06 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
गैस संकट में एजेंसियों का खेल! 80 हजार उपभोक्ताओं से 35 रुपए वसूले, 28 लाख कमाए, जांच शुरू
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

गैस की किल्लत से जूझ रहे लोगों के लिए मुश्किलें कम नहीं थीं, लेकिन इसी संकट में बड़ा खेल सामने आया है। देश में सिलेंडर की कमी के बीच एजेंसियों ने 80,000 उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पैसा लेकर करीब ₹28 लाख कमा लिए।


संकट के बीच लंबी कतारें, मजबूरी में पहुंचे लोग

हाल के दिनों में गैस की भारी कमी के कारण लोग घरों से सिलेंडर उठाकर सीधे एजेंसियों के बाहर लाइन में लगने लगे। स्थिति ऐसी हो गई कि कई घरों में चूल्हा तक ठंडा पड़ गया। इस मजबूरी ने एजेंसियों को मौका दिया—और यहीं से खेल शुरू हुआ।


35 रुपए का खेल कैसे बना लाखों का मुनाफा?

नियम के मुताबिक, गैस कंपनियां एजेंसियों को होम डिलीवरी के लिए प्रति सिलेंडर ₹35 देती हैं। लेकिन जब उपभोक्ता खुद एजेंसी से सिलेंडर लेने पहुंचे, तब भी यह रकम वापस नहीं की गई। इसी तरह 80 हजार ग्राहकों से वसूली कर एजेंसियों ने करीब ₹28 लाख कमा लिए।


उपभोक्ताओं का आरोप: पैसा मांगा तो मिला इंकार

जनता नगर करोंद के निवासी राजेश कुमार ने शिकायत में बताया कि उनकी एजेंसी हैप्पी गैस एजेंसी ने होम डिलीवरी से मना कर दिया। जब वे खुद सिलेंडर लेने पहुंचे और ₹35 वापस मांगे, तो एजेंसी ने साफ इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।


रोजाना हजारों लोग, सप्लाई फिर भी कम

स्थिति अब भी सामान्य नहीं हुई है। हर दिन करीब 3,000 उपभोक्ता एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं। वहीं 12,000 से ज्यादा बुकिंग के मुकाबले सिर्फ 6-7 हजार डिलीवरी ही हो पा रही है। यानी मांग और सप्लाई का अंतर अभी भी बड़ा है—और यही गड़बड़ी की जड़ बन रहा है।


प्रशासन हरकत में, जांच शुरू

मामले की शिकायत कलेक्टर से लेकर नापतौल विभाग तक पहुंच चुकी है। नसीमुद्दीन खान (उप नियंत्रक, नापतौल) ने बताया कि तौल में गड़बड़ी और अतिरिक्त वसूली दोनों मामलों में कार्रवाई की जा रही है।


सख्ती के संकेत, एजेंसियों पर नजर

कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रमसिंह के अनुसार, सिलेंडर की कालाबाजारी और अनियमितताओं की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जो भी एजेंसी दोषी पाई जाएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अब देखना होगा कि उपभोक्ताओं को उनका पैसा वापस मिलता है या नहीं।

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