
भोपाल। मध्यप्रदेश में जेंडर चेंज सर्जरी के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। AIIMS भोपाल में पिछले 1 साल में 5 युवक सर्जरी के जरिए महिला बन चुके हैं—यह ट्रेंड अब छोटे शहरों और गांवों तक पहुंच चुका है, जो समाज में बड़े बदलाव का संकेत देता है।
छोटे शहरों से सामने आ रही नई पहचान की कहानी
राजगढ़ के रहने वाले सोमेश का मामला इसी बदलाव की मिसाल है। बचपन से ही उनका व्यवहार लड़कियों जैसा था और 10 साल की उम्र के बाद यह स्पष्ट हो गया कि उनकी पहचान अलग है। 24 साल की उम्र में उन्होंने सर्जरी कराकर खुद को महिला के रूप में स्थापित किया। यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक सोच का संकेत है—जो अब बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा।
AIIMS भोपाल में बढ़ते केस, डॉक्टरों ने दी जानकारी
AIIMS Bhopal में बीते एक साल में 5 जेंडर कंवर्जन सर्जरी की गई हैं। इन सभी मरीजों की उम्र 22 से 28 साल के बीच रही। डॉक्टरों के मुताबिक, यह केवल ऑपरेशन नहीं बल्कि मानसिक, सामाजिक और शारीरिक रूप से लंबी प्रक्रिया होती है—और यहीं से असली चुनौती शुरू होती है।
बॉटम सर्जरी: सबसे जटिल चरण
AIIMS भोपाल के डॉक्टरों के अनुसार, जेंडर कंवर्जन में सबसे कठिन हिस्सा बॉटम सर्जरी होता है, जिसमें पुरुष के प्राइवेट पार्ट को हटाकर महिला अंग बनाए जाते हैं। यह सर्जरी तकनीकी रूप से बेहद जटिल है। निजी अस्पतालों में इसकी लागत 8 से 10 लाख रुपए तक होती है, जबकि AIIMS में यह फिलहाल नि:शुल्क की जा रही है—जो मरीजों के लिए बड़ी राहत है।
सर्जरी से पहले लंबी काउंसलिंग जरूरी
डॉक्टर बताते हैं कि जेंडर चेंज का फैसला तुरंत नहीं लिया जाता। इसके लिए मानसिक मूल्यांकन, काउंसलिंग और हार्मोन थेरेपी की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कई मामलों में मरीजों को समझाया भी जाता है कि वे भावनात्मक दबाव में निर्णय न लें—यानी यह सिर्फ मेडिकल नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी बदलने वाला फैसला है।
केस स्टडी 1: बचपन का ट्रॉमा बना वजह
रीवा के अनुराग (बदला नाम) के साथ बचपन में हुए शोषण ने उनकी सोच को बदल दिया। 9 साल की उम्र में हुए इस अनुभव के बाद उनके मन में यह भावना गहरी हो गई कि अगर वे लड़की होते तो शायद ऐसा न होता। बाद में आर्थिक रूप से सक्षम होने पर उन्होंने अक्टूबर 2025 में AIIMS भोपाल में सर्जरी करवाई—जो सफल रही।
केस स्टडी 2: परिवार के तानों ने लिया बड़ा फैसला
भोपाल के पास रहने वाले 24 वर्षीय युवक ने बताया कि बचपन से ही उन्हें परिवार से ताने मिलते रहे। उनका कहना था कि वे खुद को हमेशा महिला महसूस करते थे, लेकिन समाज और परिवार ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। यही दबाव उन्हें जेंडर चेंज की ओर ले गया—जो आज उनकी नई पहचान बन चुका है।
केस स्टडी 3: गलत सर्जरी ने बढ़ाई मुश्किलें
इंदौर के एक 28 वर्षीय युवक के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने पहले कानपुर में सर्जरी करवाई, जो फेल हो गई। बाद में अहमदाबाद में भी इलाज सफल नहीं हुआ। अंततः AIIMS भोपाल में उनकी 8 घंटे लंबी सर्जरी हुई, जिसके बाद अब उनका इलाज जारी है।
गलत सर्जरी के खतरे बेहद गंभीर
डॉक्टरों के अनुसार, जरा सी गलती मरीज के जीवन पर स्थायी असर डाल सकती है। कुछ मामलों में मरीजों ने संवेदनशीलता (sensation) खो दी, तो कहीं अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचा। ऐसे मामलों में दोबारा सर्जरी करना और भी जटिल हो जाता है—जो इस प्रक्रिया की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
AIIMS में खास ट्रांसजेंडर क्लीनिक
AIIMS भोपाल में पिछले 2 साल से ट्रांसजेंडर हेल्थ क्लीनिक संचालित हो रहा है। यहां मनोचिकित्सा, एंडोक्रिनोलॉजी, यूरोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी के विशेषज्ञ मिलकर इलाज करते हैं। हर महीने पहले और तीसरे गुरुवार को ओपीडी लगती है, जहां मरीज खुलकर अपनी समस्याएं बता सकते हैं।
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