
गुना में सरकारी सिस्टम की नींव हिला देने वाला मामला सामने आया है। जिला कोषालय में करोड़ों रुपये के सरकारी स्टाम्प की हेराफेरी पकड़े जाने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। जांच में खुलासा हुआ कि जितने स्टाम्प बेचे गए, उनका पूरा पैसा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं किया गया। इस गंभीर अनियमितता के बाद कोषालय के खजांची के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किया गया है।
निरीक्षण में खुला करोड़ों का खेल
दिसंबर 2025 में ग्वालियर से आई संयुक्त संचालक, कोष एवं लेखा की टीम ने जब जिला कोषालय का निरीक्षण किया, तब गड़बड़ी सामने आई। टीम ने आईएफएमआईएस रिपोर्ट और कोषालय में मौजूद स्टाम्प के भौतिक स्टॉक का मिलान कराया, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर पाया गया।
जांच में सामने आया कि खजांची द्वारा
₹3 करोड़ 74 लाख के स्टाम्प जारी किए गए,
जबकि कंप्यूटर सिस्टम में सिर्फ
₹1 करोड़ 1 लाख की एंट्री दर्ज थी।
यानी करीब ₹2.70 करोड़ का सीधा अंतर पाया गया।
बिना रिकॉर्ड स्टाम्प बेच दिए गए
शिकायत में बताया गया है कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच कई बार बिना अनुमति, बिना कंप्यूटर एंट्री और बिना पावती
के ही स्टाम्प वेंडरों को सौंप दिए गए। स्टाम्प बाहर तो चले गए, लेकिन उनका कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं बनाया गया।
डबल लॉक से सिंगल लॉक तक खेल
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कोषालय की सुरक्षा व्यवस्था के तहत बनाए गए डबल लॉक सिस्टम से छेड़छाड़ की गई। खजांची ने इसे सिंगल लॉक में बदलकर स्टाम्प निकाले। इसके अलावा बैंक रिकॉर्ड, वेंडरों की रसीदें और अन्य अहम दस्तावेज भी सुरक्षित नहीं रखे गए।
हिसाब नहीं दे पाए खजांची
जब खजांची केशव शर्मा से 2.70 करोड़ रुपये के अंतर को लेकर जवाब मांगा गया, तो वे कोई ठोस जानकारी नहीं दे सके। इसके बाद वरिष्ठ कोषालय अधिकारी राकेश कुमार ने कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच में हो सकते हैं और बड़े खुलासे
अब पुलिस और प्रशासन की जांच में यह देखा जाएगा कि इस घोटाले में कोई और कर्मचारी शामिल था या नहीं
पैसा कहां गया और स्टाम्प किन-किन लोगों को दिए गए
यह मामला पूरे कोषालय सिस्टम की निगरानी पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
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