
भोपाल। मध्यप्रदेश को देश के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) की सौगात मिलने जा रही है। भारत सरकार के संचार मंत्रालय और मध्यप्रदेश सरकार के बीच नई दिल्ली में हुए एमओयू के बाद ग्वालियर को ग्लोबल टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब एवं स्पेशल इकोनॉमिक जोन के रूप में विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे प्रदेश के औद्योगिक विकास की ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि ग्वालियर में बनने वाले इस जोन में तैयार संचार उपकरण देशभर में भेजे जाएंगे और यह "मेक इन मध्यप्रदेश, फेथ इन मध्यप्रदेश" की अवधारणा को मजबूत करेगा।
170.5 एकड़ में विकसित होगा अत्याधुनिक औद्योगिक इकोसिस्टम
यह परियोजना लगभग 170.5 एकड़ क्षेत्र में प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर विकसित होगी। इसका उद्देश्य टेलीकॉम उपकरणों के डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और एक्सपोर्ट तक की पूरी वैल्यू चेन को एक ही स्थान पर स्थापित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जोन भविष्य में वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की क्षमता रखता है।
एमओयू के बाद निवेश और रोजगार की बड़ी उम्मीद
उद्योगपतियों के साथ हुई राउंड टेबल बैठक में इस परियोजना के लिए करीब ₹3,500 करोड़ के निवेश तथा 14 हजार से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना व्यक्त की गई। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से ग्वालियर के इस टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश का आह्वान करते हुए भरोसा दिलाया कि उद्योगों को प्रदेश में हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
किन उपकरणों का होगा निर्माण
इस जोन में भविष्य की संचार तकनीक से जुड़े कई उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं—
5जी और 6जी उपकरण
ऑप्टिकल फाइबर उपकरण
सेमीकंडक्टर उपकरण
डिवाइस नेटवर्किंग उपकरण
इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे भारत डिजिटल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस क्षेत्र में अपनी वैश्विक स्थिति और मजबूत करेगा।
विश्वस्तरीय टेस्टिंग और साइबर सिक्योरिटी सुविधाएं
परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में अत्याधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाएं शामिल होंगी। यहां विकसित की जाएंगी:
5जी कोर नेटवर्क परीक्षण सुविधा
सैटेलाइट कम्युनिकेशन टेस्टिंग
ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) परीक्षण
सिम, पीओएन और राउटर परीक्षण
4जी एवं 5जी नेटवर्क के लिए साइबर सिक्योरिटी लैब
इन सुविधाओं के बाद उद्योगों को परीक्षण और प्रमाणन के लिए दूसरे राज्यों या विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
सरकार ने तय किया विशेष प्रोत्साहन पैकेज
टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश करने वाले उद्योगों को कई विशेष सुविधाएं दी जाएंगी।
30 वर्ष तक ₹1 प्रति वर्गमीटर वार्षिक लीज़ किराया
100% स्टाम्प ड्यूटी प्रतिपूर्ति
₹1 का नाममात्र भूमि प्रीमियम
पहले 5 वर्षों तक ₹2 प्रति यूनिट बिजली टैरिफ रिबेट
₹25 प्रति केएलडी जल शुल्क
50% पूंजी सब्सिडी (अधिकतम ₹200 करोड़)
आरएंडडी सहायता (अधिकतम ₹25 करोड़)
निर्यात फ्रेट सब्सिडी
ईटीपी एवं जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सहायता
प्रशिक्षण सहायता
रोजगार सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि CAPEX सहायता के लिहाज से यह प्रोत्साहन पैकेज विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी है।
केंद्र और राज्य की संयुक्त भागीदारी
परियोजना का विकास विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से होगा।
मध्यप्रदेश सरकार की हिस्सेदारी – 51%
भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की हिस्सेदारी – 49%
एमपीआईडीसी परियोजना का मास्टर डेवलपर होगा। भारत सरकार ने इसके लिए ₹493 करोड़ की अनुदान सहायता स्वीकृत की है।
लॉजिस्टिक्स से मिलेगा बड़ा लाभ
मुख्यमंत्री के अनुसार ग्वालियर की भौगोलिक स्थिति उद्योगों के लिए अनुकूल है। यहां का हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन, आईसीडी मालनपुर, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और दिल्ली की निकटता बेहतर लॉजिस्टिक नेटवर्क उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि ग्वालियर उत्तर भारत में इंजीनियरिंग सर्विसेज, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और तकनीकी संस्थानों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन मध्यप्रदेश को मिलना बड़ी उपलब्धि है। यहां बनने वाले संचार उपकरण पूरे देश में सप्लाई किए जाएंगे। यह परियोजना निर्यात बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में मदद करेगी। स्मार्ट एआई मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, हेल्थ और गुड गवर्नेंस में टेलीकॉम सेक्टर की भूमिका लगातार बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रदेश को दी गई प्रमुख परियोजनाओं में यह भी महत्वपूर्ण पहल है।
आज झाबुआ के थांदला में रहेगा मुख्यमंत्री का दौरा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को झाबुआ जिले के थांदला में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होंगे।
कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु:
₹300 करोड़ का ऋण स्व-सहायता समूहों को वितरित करेंगे।
राज्य स्तरीय स्व-सहायता समूह क्षमता-वर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में भाग लेंगे।
प्राकृतिक खेती करने वाले उन्नत किसानों से संवाद कर उनके अनुभव जानेंगे।
सरकार के अनुसार यह कार्यक्रम महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, ग्रामीण आजीविका संवर्धन और स्व-रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
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