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भोपाल में पुरुषों पर बढ़ी प्रताड़ना! अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस पर ‘भाई’ संस्था देगी कानूनी और मानसिक सहारा

19 नव, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में पुरुषों पर बढ़ी प्रताड़ना! अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस पर ‘भाई’ संस्था देगी कानूनी और मानसिक सहारा

भोपाल में पुरुषों पर बढ़ी प्रताड़ना! अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस पर ‘भाई’ संस्था देगी कानूनी और मानसिक सहारा

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पुरुषों पर घरेलू प्रताड़ना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस साल ‘भाई’ संस्था की पुरुष हेल्पलाइन पर अब तक 4640 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जो पिछले साल की 2125 शिकायतों से दोगुनी से भी ज्यादा हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस 19 नवंबर की थीम रखी गई है – “पुरुषों और लड़कों का समर्थन”। ‘भाई’ संस्था फाउंडर जकी अहमद बताते हैं, “हम घरेलू हिंसा अधिनियम के दुरुपयोग के खिलाफ कानूनी सहायता और मानसिक सहारा दे रहे हैं। पुरुषों को समाज में समान अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए।”


चिनार पार्क में कैंडल मार्च और जागरूकता कार्यक्रम

बुधवार को चिनार पार्क में कैंडल जलाकर उन पुरुषों को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिन्होंने पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या की। इसके अलावा प्रदेशभर में जागरूकता कार्यक्रम, आमसभा, विधिक सहायता और स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।

हेल्पलाइन: 8882498498

इस साल तक पुरुष और उनके परिजन मदद के लिए इस हेल्पलाइन से जुड़े हैं।


पुरुषों के खिलाफ बढ़ते मामले और केस स्टडीज

केस 1: करोंद निवासी सौरभ तलाक के बाद दोबारा शादी की जिद के मामले में फंसे थे। भाई संस्था की विधिक सहायता से अब वह फिर कोर्ट में मामले को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

केस 2: सुरेश की पत्नी ने शादी के पहले जुड़वां बच्चों के जन्म की बात छिपाई। तीन माह बाद पत्नी मायके चली गई और तलाक के एवज में 25 लाख रुपये की मांग कर रही है। मामला कोर्ट में है।

केस 3: हरीश ने पहली पत्नी की मौत के बाद दूसरी शादी की। छह माह बाद पत्नी ने दहेज प्रताड़ना दर्ज कर दी और भरण-पोषण के साथ संपत्ति में हिस्सा मांग रही है। पहले पति से भी ऐसा ही मामला दर्ज हो चुका है।


सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

संस्था के प्रयासों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 498ए में बिना जांच गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अब घरेलू हिंसा मामलों में डीआईआर भरना अनिवार्य है। इससे पुरुषों को गलत आरोपों से सुरक्षा मिलेगी।

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