
भोपाल। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में बुधवार को माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच हुए संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान वीरता की अनोखी मिसाल पेश करते हुए हॉक फोर्स के निरीक्षक आशीष शर्मा शहीद हो गए। छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र बॉर्डर पर चल रहे इस सर्च अभियान के दौरान अचानक नक्सलियों ने तीन से चार राउंड फायरिंग शुरू कर दी। गोली आशीष शर्मा के जांघ और कंधे में लगी, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी शहादत पर पूरा प्रदेश गर्व महसूस कर रहा है।
बालाघाट में हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई, भावुक हुआ शहर
गुरुवार सुबह बालाघाट के आंबेडकर चौक से पुलिस लाइन तक श्रद्धांजलि यात्रा निकाली गई। फूलों से सजे वाहन में रखे शहीद आशीष शर्मा के पार्थिव शरीर के साथ हॉक फोर्स, CRPF, कोबरा और जिला पुलिस के जवान बड़ी संख्या में शामिल हुए। कलेक्टर मृणाल मीना, पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और आम नागरिकों ने भी नम आंखों से उन्हें अंतिम सलाम किया। पुलिस लाइन में जब जवानों ने पुष्प अर्पित कर ‘आशीष शर्मा अमर रहें’ के नारे लगाए तो माहौल भावनात्मक हो गया। साथी जवानों और अधिकारियों की आंखें भर आईं। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा भी भावुक हो उठे।
वीरता का प्रतीक… दो बार वीरता पदक से सम्मानित
इंस्पेक्टर आशीष शर्मा नरसिंहपुर जिले के बोहानी गांव के रहने वाले थे और 2016 बैच के बहादुर अधिकारी थे। वे बुधवार को हुए संयुक्त अभियान का नेतृत्व कर रहे थे।
उन्होंने कई सफल अभियानों में अपनी भूमिका निभाई और दो बार वीरता पदक से सम्मानित किए गए थे।
पैतृक गांव बोहानी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
श्रद्धांजलि सभा के बाद उनका पार्थिव शरीर बालाघाट से पैतृक गांव बोहानी, नरसिंहपुर के लिए रवाना किया गया। यहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस अंतिम विदाई में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। उन्होंने आशीष शर्मा की वीरता और शहादत पर दुख जताते हुए कहा, “मध्यप्रदेश को आशीष जैसा वीर सपूत देने का गौरव है। उनका बलिदान राज्य कभी नहीं भूलेगा।”
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