शनिवार, 25 जुलाई 2026
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मध्यप्रदेश में बढ़ती बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

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मध्यप्रदेश में बढ़ती बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

मध्यप्रदेश में बढ़ती बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। जबलपुर में हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान प्रदेश में लगातार हो रही बाघों की मौतों का मामला गर्मा गया। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि साल 2026 की शुरुआत से अब तक मध्यप्रदेश में 10 बाघों की जान जा चुकी है और इनमें कई मामलों में करंट जैसे अप्राकृतिक कारण सामने आए हैं। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।


2025 में रिकॉर्ड स्तर पर हुईं मौतें

याचिका में यह भी बताया गया कि वर्ष 2025 में प्रदेश में कुल 54 बाघों की मौत दर्ज की गई थी, जो प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद किसी एक राज्य में एक साल में सबसे ज्यादा मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार दुनिया में करीब 5,421 बाघ मौजूद हैं, जिनमें से 3,167 भारत में पाए जाते हैं। मध्यप्रदेश में 785 टाइगर होने के कारण इसे ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है, लेकिन बढ़ती मौतों ने चिंता बढ़ा दी है।


पोचिंग से लेकर करंट तक बने मौत के कारण

आवेदक ने अदालत को बताया कि पिछले पांच सालों में प्रदेश में 222 बाघों की मौत हो चुकी है और हर साल आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में 34, 2022 में 43, 2023 में 45, 2024 में 46 और 2025 में 54 बाघों की मौत हुई। इनमें शिकार, करंट लगना, ट्रेन हादसे और रहस्यमयी परिस्थितियां प्रमुख कारण बताए गए हैं। खासतौर पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में करीब 57 प्रतिशत मौतें अप्राकृतिक बताई गई हैं।


कोर्ट में क्या हुई बहस

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने विस्तृत जानकारी अदालत के सामने रखी। केंद्र सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया, लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता देखते हुए दो सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अलका सिंह भी पैरवी कर रही हैं।

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