
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रेलवे प्रोजेक्ट के नाम पर हजारों पेड़ों की कटाई हो रही थी, लेकिन हाई कोर्ट ने इस पर बड़ा फैसला सुनाते हुए तुरंत पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “बिना शाखाओं वाले तनों को कहीं और गाड़ देने से वे जीवित नहीं हो जाएंगे। यह ट्रांसप्लांटेशन नहीं, पेड़ों की सीधी कटाई है।” हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले को पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताते हुए रेलवे प्रोजेक्ट को बड़ा झटका दिया है।
भोपाल में 8,000 पेड़ों पर चला था ‘कुल्हाड़ी अभियान’
मामले में हस्तक्षेपकर्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने कोर्ट को बताया, रेलवे प्रोजेक्ट के तहत भोपाल में 8,000 पेड़ों को काटने की तैयारी थी। इनमें से ज्यादातर पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि 488 पेड़ अभी बचे हुए हैं, जिनकी कटाई रोकी गई है। कोर्ट में मीडिया की कई रिपोर्ट्स और तस्वीरें भी पेश की गईं। कोर्ट ने इन रिपोर्ट्स को देखने के बाद स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की।
हाई कोर्ट का कड़ा रुख
कोर्ट ने स्पष्ट कहा, “पेड़ों का सिर्फ ट्रांसप्लांटेशन का नाम लेकर उनकी बलि दी जा रही है। यह पर्यावरण के लिए बेहद गंभीर खतरा है।” साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिए, सभी कटाई स्थलों की तस्वीरें और वीडियो कोर्ट में पेश किए जाएं। वहीं अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी
हाई कोर्ट ने कहा, ‘ये ट्रांसप्लांटेशन नहीं, सीधी कटाई है’
कोर्ट ने कहा कि बिना जड़ों और शाखाओं के सिर्फ तनों को कहीं गाड़ देना ट्रांसप्लांटेशन नहीं होता, और ऐसे पेड़ जीवित नहीं रह सकते।
यह सीधे-सीधे पेड़ों की हत्या है।
पर्यावरण विशेषज्ञों की चेतावनी
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, भोपाल पहले से ही ग्रीन कवर घटने की समस्या से जूझ रहा है। 8 हजार पेड़ों की कटाई से शहर का औसत तापमान 2°C तक बढ़ सकता है। ऑक्सीजन उत्पादन, भूजल, और प्रदूषण स्तर पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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