
भोपाल। फिल्म शोले का मशहूर डायलॉग “होली कब है?” इस साल सच में लोगों के मन का सवाल बन गया है। पूर्णिमा तिथि, भद्रा और चंद्रग्रहण के संयोग ने होली की तारीखों को लेकर भ्रम बढ़ा दिया है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार होलिका दहन और रंगों की होली अलग-अलग दिन मनाई जाएगी।
क्यों बदल गया होली का कैलेंडर?
आमतौर पर होलिका दहन के अगले दिन धुलेंडी मनाई जाती है, लेकिन इस साल पंचांग की स्थिति अलग है। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगी। इसी दौरान भद्रा काल और फिर चंद्रग्रहण का असर होने से त्योहार की टाइमिंग में बदलाव किया गया है। सरकारी अवकाश सूची में जहां 2 मार्च को होलिका दहन और 3 मार्च को धुलेंडी दर्शाई गई है, वहीं ज्योतिषियों का कहना है कि ग्रहण और सूतक के कारण रंगों का पर्व 4 मार्च को मनाना ज्यादा उचित रहेगा।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा?
भोपाल के पंडितों के अनुसार पूर्णिमा 2 मार्च शाम करीब 6 बजकर 04 मिनट पर लगेगी और उसी समय भद्रा भी शुरू हो जाएगी। भद्रा का समापन 3 मार्च सुबह करीब 5 बजकर 1 मिनट पर होगा। ब्रह्ममुहूर्त यानी सुबह 5:01 से सूर्योदय तक होलिका दहन का श्रेष्ठ समय माना गया है। जरूरी स्थिति में रात करीब 2 बजे के बाद भद्रा के पूंछ काल में भी दहन किया जा सकता है। ज्योतिषाचार्यों का तर्क है कि भद्रा काल में शुभ कार्यों से बचना चाहिए, इसलिए समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
3 मार्च को चंद्रग्रहण का असर
इस बार 3 मार्च को चंद्रग्रहण भी पड़ रहा है, जिससे धुलेंडी की तारीख बदलने की सलाह दी जा रही है। ग्रहण का सूतक सूर्योदय के बाद शुरू होकर शाम तक रहेगा।
पंडितों के मुताबिक:
ग्रहण का स्पर्श दोपहर करीब 3:20 बजे
मध्यकाल लगभग 5:04 बजे
मोक्ष शाम करीब 6:47 बजे
भोपाल में सूर्यास्त के समय यह ग्रहण कुछ समय के लिए दिखाई दे सकता है। ग्रहण के दौरान मंदिरों के पट बंद रहने की परंपरा भी है।
आखिर कब मनाई जाएगी धुलेंडी?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार उदयकालीन प्रतिपदा 4 मार्च को पड़ रही है, इसलिए रंगों की होली यानी धुलेंडी 4 मार्च को मनाना ज्यादा शुभ माना जा रहा है। शहर के कई मंदिरों में भी इसी दिन उत्सव आयोजित होंगे।
4 मार्च को निकलेगा होली का चल समारोह
हिंदू उत्सव समिति ने भी अपने पारंपरिक होली जुलूस की तारीख बदल दी है। समिति के अनुसार चंद्रग्रहण के कारण 3 मार्च को कार्यक्रम नहीं होगा। अब 4 मार्च को रंग-गुलाल, झांकियां, बैंड और ढोल-ताशों के साथ भव्य चल समारोह निकाला जाएगा।
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