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Holi 2026 Lunar Eclipse: होली की शाम दिखेगा ‘ब्लड मून’, जानें MP में कब और कितनी देर नजर आएगा चंद्रग्रहण

03 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
Holi 2026 Lunar Eclipse: होली की शाम दिखेगा ‘ब्लड मून’, जानें MP में कब और कितनी देर नजर आएगा चंद्रग्रहण
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। होली की रंगीन शाम इस बार आसमान में भी अनोखा नजारा लेकर आएगी। 3 मार्च, मंगलवार को पूर्णिमा के दिन पूर्ण चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना होगी। मध्य प्रदेश में यह ग्रहण ‘ग्रस्तोदय’ के रूप में दिखाई देगा—यानी चंद्रोदय के समय चंद्रमा पहले से ग्रहणग्रस्त रहेगा। हालांकि भारत में पूर्ण चरण नहीं, बल्कि केवल अंतिम आंशिक चरण ही कुछ समय के लिए देखा जा सकेगा।


क्या है ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण?

जब चंद्रमा उदित होते ही पहले से पृथ्वी की छाया में होता है, तो उसे ग्रस्तोदय कहा जाता है। इस बार भारत में चंद्रोदय शाम को होगा, जबकि ग्रहण का बड़ा हिस्सा पहले ही बीत चुका होगा। इस वजह से यहां दर्शकों को ग्रहण का सीमित दृश्य ही मिल पाएगा।


‘ब्लड मून’ क्यों बनता है?

विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के अनुसार, पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी की पूर्ण छाया (अम्ब्रा) से होकर गुजरता है। पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की नीली किरणों को बिखेर देता है और केवल लाल रंग की रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है। इसी कारण चंद्रमा तांबे या गहरे लाल रंग का दिखाई देता है। इस खगोलीय दृश्य को आम भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।


चंद्रग्रहण का पूरा टाइमटेबल

खगोलीय गणना के अनुसार ग्रहण का क्रम इस प्रकार रहेगा:


आंशिक ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 3:20:07 बजे

पूर्णग्रहण शुरू: शाम 4:34:34 बजे

पूर्णग्रहण समाप्त: शाम 5:32:49 बजे

आंशिक ग्रहण समाप्त: शाम 6:47:15 बजे


पूर्णग्रहण की कुल अवधि 58 मिनट रहेगी।


लेकिन भारत में चंद्रोदय शाम को होने के कारण केवल अंतिम आंशिक चरण ही दिखाई देगा।


मध्य प्रदेश में कहां कितनी देर दिखेगा ग्रहण?

पूर्वी जिलों में: लगभग 40–45 मिनट तक दृश्य संभव

पश्चिमी जिलों में: करीब 10 मिनट तक ही नजर आएगा

जिन शहरों में चंद्रोदय जल्दी होगा, वहां ग्रहण अपेक्षाकृत अधिक समय तक दिखाई देगा।


क्या चंद्रग्रहण देखने के लिए खास चश्मा जरूरी है?


विशेषज्ञों के अनुसार चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है। सूर्यग्रहण की तरह इसमें किसी विशेष फिल्टर या चश्मे की आवश्यकता नहीं होती।


होली और खगोल विज्ञान का अनोखा संगम

होली आमतौर पर पूर्णिमा की रात को मनाई जाती है। ऐसे में इस बार रंगों के त्योहार के साथ ‘ब्लड मून’ का दुर्लभ दृश्य इसे और खास बना सकता है। खगोल प्रेमियों के लिए यह अवसर खास रहेगा, हालांकि मौसम साफ होना जरूरी है।

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