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पुलिस ने बाइक की चाबी निकाली तो पड़ेगा भारी! कोर्ट से दिला सकते हैं सजा, जानिए पूरा कानून

01 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
पुलिस ने बाइक की चाबी निकाली तो पड़ेगा भारी! कोर्ट से दिला सकते हैं सजा, जानिए पूरा कानून

पुलिस ने बाइक की चाबी निकाली तो पड़ेगा भारी! कोर्ट से दिला सकते हैं सजा, जानिए पूरा कानून

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। क्या ट्रैफिक चेकिंग के दौरान पुलिस आपकी बाइक या स्कूटर की चाबी निकाल सकती है? अगर आपके साथ ऐसा हुआ है तो यह खबर आपके अधिकारों का हथियार बन सकती है! बहुत से लोगों को नहीं पता कि बिना वैध कारण वाहन की चाबी निकालना कानूनन गलत है और इसके लिए पुलिसकर्मी पर केस भी दर्ज कराया जा सकता है। मोटर व्हीकल एक्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस पर साफ दिशा-निर्देश हैं।


मोटर व्हीकल एक्ट क्या कहता है?


मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ट्रैफिक उल्लंघन होने पर पुलिस चालान कर सकती है, लेकिन सामान्य रूप से चाबी निकालने का अधिकार नहीं है। वाहन मालिक को खतरे में डालने वाला कोई भी कदम अवैध है। चाबी निकालना न केवल नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि इससे सड़क हादसे का खतरा भी बढ़ जाता है।


BNS की धारा 195 के तहत पुलिसकर्मी पर बन सकता है केस

नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अगर पुलिस बिना आधार रोकती है तो यह धारा 125 के तहत गलत तरीके से रोकना माना जाएगा।  अगर चाबी निकाली जाती है या डराया जाता है तो यह धारा 195 के तहत सरकारी कर्मचारी द्वारा कानून तोड़ना है। वहीं धक्का देने, डराने या बल प्रयोग करने पर यह धारा 131 / 132 / 136 के तहत अनुचित बल प्रयोग की श्रेणी में आएगा।


जान जोखिम में डाली तो दर्ज होगी FIR

अगर पुलिस द्वारा चाबी निकालने से दुर्घटना का खतरा बना, कोई घायल हुआ या जान पर जोखिम आया तो यह धारा 352 के तहत मानव जीवन को खतरे में डालने का अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में पुलिसकर्मी पर एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।


सुप्रीम कोर्ट की साफ गाइडलाइन

पुलिस केवल इन्हीं परिस्थितियों में वाहन रोक सकती है—

ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन

वाहन अपराध से जुड़ा हो

संदिग्ध गतिविधि

पहचान की जांच की आवश्यकता

इसके अलावा सिर्फ शक के आधार पर चाबी निकालना या वाहन रोकना अवैध है।


पुलिस न सुने तो यहां करें शिकायत

अगर पुलिसकर्मी मनमानी करे तो पहले उच्च अधिकारियों से शिकायत करें। यदि वहां कार्रवाई न हो तो BNSS धारा 173(3) के तहत मजिस्ट्रेट से FIR के आदेश की मांग करें। अगर जांच में टालमटोल हो रही हो, तो BNSS धारा 175 के तहत अनिवार्य जांच के आदेश मांगे जा सकते हैं।

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