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अहाते बंद होने के बाद ढाबों में चल रहा शराब का अवैध कारोबार! भोपाल में शराब माफिया का नाइट-लाइफ नेटवर्क बेनकाब

30 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
अहाते बंद होने के बाद ढाबों में चल रहा शराब का अवैध कारोबार! भोपाल में शराब माफिया का नाइट-लाइफ नेटवर्क बेनकाब

अहाते बंद होने के बाद ढाबों में चल रहा शराब का अवैध कारोबार! भोपाल में शराब माफिया का नाइट-लाइफ नेटवर्क बेनकाब

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राजधानी भोपाल में अब रात का मतलब सिर्फ सन्नाटा नहीं, बल्कि ढाबों के अंदर चलती शराब की महफिलें भी हैं। कभी जहां लोग खाना खाने रुकते थे, वहीं अब जाम टकराए जा रहे हैं। साल 2023 में अहाते बंद हुए तो लगा था कि शराबखोरी पर लगाम लगेगी, लेकिन असल में इस फैसले ने शराब माफिया को खुला मैदान दे दिया। नतीजा – राजधानी में ढाबों के नाम पर पूरा अवैध नाइट-लाइफ नेटवर्क खड़ा हो गया।


अहाते बंद हुए, अवैध बार खुल गए

तत्कालीन शिवराज सरकार ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने के हवाले से शराब के अहाते बंद कर दिए थे। मकसद था – सड़कों पर शराबखोरी रोकी जाए। लेकिन इसका उल्टा असर हुआ। शराब पीने वालों के लिए नई जगहें तलाश ली गईं और भोपाल के कई ढाबे धीरे-धीरे बिना लाइसेंस वाले बार बन गए। यह पूरा खेल शराब माफिया और ढाबा संचालकों की मिलीभगत से चल रहा है, जहां शराब की सप्लाई से लेकर पुलिस की ‘सेटिंग’ तक सब पहले से तय रहता है।


स्टिंग ऑपरेशन में खुली पोल

एक स्टिंग ऑपरेशन में सामने आया कि ढाबों पर खुलेआम शराब परोसी जा रही है। संचालक बेखौफ कहते हैं – “पुलिस का कोई डर नहीं, सब मैनेज है।” ऑर्डर पर शराब, पूरी प्रॉपर्टी पार्टी के लिए बुक करने की सुविधा और रेड से बचाने की गारंटी तक दी जा रही है।


कोलार रोड का ‘नटखट ढाबा’ बना अवैध अड्डा

भोपाल के कोलार रोड पर स्थित नटखट ढाबा इस नेटवर्क का बड़ा चेहरा बनकर उभरा है। ढाबा चला रहे वीरेंद्र राजपूत का दावा है कि यहां जितनी मर्जी शराब मंगाओ, रात 11:30 बजे तक सब मिल जाएगी। 12 हजार रुपए रोज में पूरी प्रॉपर्टी पार्टी के लिए, 24 घंटे प्राइवेसी और शराब। पुलिस या आबकारी आए तो “नाम पूछकर चली जाएगी।” वीरेंद्र यह भी कहता है कि यह प्रॉपर्टी पूर्व बीजेपी विधायक ध्रुव नारायण सिंह की है।


डायल 112 की परीक्षा… और सिस्टम फेल

रात 11:45 बजे अवैध शराब पिलाने की शिकायत डायल 112 पर की गई। मैसेज आया कि पुलिस 11:55 तक पहुंचेगी। लेकिन असलियत कुछ और थी। करीब 45 मिनट तक पुलिस नहीं पहुंची। अंदर शराब चलती रही, पार्टी होती रही। आखिर रात 1:05 बजे पुलिस आई, ढाबा संचालक से बात की और बिना कोई कार्रवाई किए 5 मिनट में लौट गई। न कोई शराब जब्त, न कोई केस – ठीक वैसा ही जैसा पहले से कहा गया था कि “सब सेट है।”


बंगरसिया के ढाबे भी पीछे नहीं

भोपाल के बंगरसिया इलाके में भी हालात वही हैं।

ठाकुर फैमिली ढाबा

यहां संचालक धनीराम केवट ने कहा कि आरएस, ओल्ड मॉन्क जैसी ब्रांडेड शराब आसानी से मिल जाएगी। 10-12 लोगों की पार्टी के लिए पहले से बताने पर पूरा इंतजाम कर दिया जाएगा।


प्राइवेट स्पेस में शराब

दूसरे ठाकुर फैमिली ढाबा में छोटे-छोटे प्राइवेट केबिन बने हैं, ताकि लोग बिना किसी डर के शराब पी सकें। संचालक प्रमोद सिंह जादौन ने ओल्ड मॉन्क साढ़े 500 रुपए में देने की बात कही – जो सरकारी ठेके से भी सस्ती है।


दिन में दो बार होती है शराब की सप्लाई

सूत्रों के मुताबिक इन ढाबों पर शराब की सप्लाई पूरी तरह मैनेज्ड है। सुबह करीब 11 बजे और शाम 6 से 7 बजे। यानी यह कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि एक पूरा संगठित अवैध नेटवर्क है।


कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल

भोपाल में ढाबों के नाम पर चल रहा यह शराब का कारोबार सिर्फ नियमों की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी को दिखाता है। जब शिकायत पर भी कार्रवाई न हो और माफिया बेखौफ हो, तो सवाल उठना लाज़मी है – आखिर इस अवैध नाइट लाइफ को किसका संरक्षण है?

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