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उज्जैन में सरकार ने वापस लिया सिंहस्थ क्षेत्र का लैंड पूलिंग एक्ट, जारी हुआ आदेश

16 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
उज्जैन में सरकार ने वापस लिया सिंहस्थ क्षेत्र का लैंड पूलिंग एक्ट, जारी हुआ आदेश

उज्जैन में सरकार ने वापस लिया सिंहस्थ क्षेत्र का लैंड पूलिंग एक्ट, जारी हुआ आदेश

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में जमीनों के स्थाई अधिग्रहण को लेकर लाया गया लैंड पूलिंग एक्ट आखिरकार सरकार ने वापस ले लिया है। विधायकों और भारतीय किसान संघ के लगातार विरोध के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है। लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर उज्जैन में लंबे समय से विरोध चल रहा था। किसान संगठनों के साथ-साथ कई जनप्रतिनिधियों ने इस कानून को लेकर आपत्ति जताई थी। बढ़ते दबाव और असंतोष को देखते हुए सरकार ने सिंहस्थ क्षेत्र में इस एक्ट को वापस लेने का निर्णय किया।


क्या है लैंड पूलिंग एक्ट

लैंड पूलिंग एक्ट के तहत सरकार विकास परियोजनाओं के लिए किसानों से जमीन लेती है। इसके बाद उस क्षेत्र को विकसित कर जमीन का एक हिस्सा प्लॉट या विकसित भूमि के रूप में मूल मालिकों को लौटाया जाता है। सरकार का दावा रहा है कि इससे किसानों को बेहतर मूल्य और शहरों को सुनियोजित विकास मिलता है।


विवाद की जड़ क्या रही

उज्जैन में इस एक्ट को लेकर किसानों की मुख्य आपत्तियां ये थीं—

जमीन देने की प्रक्रिया स्वैच्छिक नहीं लग रही थी

विकसित जमीन कब और कितनी मिलेगी, इस पर स्पष्टता नहीं

सिंहस्थ और महाकाल लोक से जुड़े क्षेत्रों में जमीन की कीमत बहुत अधिक

नुकसान की आशंका

कुछ गांवों में बिना सहमति सर्वे और नोटिस की शिकायत

इन कारणों से उज्जैन में लैंड पूलिंग एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन, ज्ञापन और विरोध तेज होता चला गया।


विधायक अनिल जैन का पत्र बना अहम

उज्जैन उत्तर से बीजेपी विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इस विवाद की ओर ध्यान दिलाया था।

 पत्र में उन्होंने स्पष्ट कहा कि उज्जैन में लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर किसानों और आम नागरिकों में गहरा असंतोष है।


विधायक ने रखी ये प्रमुख मांगें

अपने पत्र में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया क, उज्जैन में लैंड पूलिंग जबर्दस्ती लागू न की जाए, किसानों और जमीन मालिकों की सहमति और भरोसा प्राथमिक शर्त ह, सिंहस्थ 2028 और धार्मिक महत्व वाले क्षेत्रों में अलग और संवेदनशील नीति अपनाई जाए और किसी भी योजना से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रभावित लोगों से संवाद किया जाए।


किसानों को मिली बड़ी राहत

सरकार के इस फैसले को उज्जैन के किसानों और जमीन मालिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लैंड पूलिंग एक्ट वापस होने से सिंहस्थ क्षेत्र में जमीनों को लेकर बना तनाव फिलहाल खत्म हो गया है।

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