
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई में आयोजित इंडिया केम-2026 में मध्यप्रदेश को रसायन व पेट्रोकेमिकल उद्योगों का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने उद्योगपतियों और निवेशकों से प्रदेश में निवेश का आह्वान किया और कहा कि सरकार ने उद्योगों की स्थापना के लिए सरल, पारदर्शी और निवेश अनुकूल व्यवस्था तैयार की है।
बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय इंडिया केम-2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि बीना में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल परियोजना और भारत पेट्रोलियम की लगभग 49 हजार करोड़ रुपये की एथिलीन क्रैकर एवं रिफाइनरी विस्तार परियोजना से प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2040 तक रसायन एवं उर्वरक क्षेत्र के वाणिज्यिक कारोबार को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में मध्यप्रदेश पेट्रोकेमिकल्स, पॉलिमर, उर्वरक, विशिष्ट रसायन और फार्मास्यूटिकल्स उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने निवेशकों को जनवरी 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश की संभावनाओं पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। एमपीआईडीसी की इस प्रदर्शनी में प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश सुविधाओं और उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सहित अन्य जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बीना में 50 हजार करोड़ की परियोजना से बढ़ेंगी संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने बीना को प्रदेश के उभरते पेट्रोकेमिकल केंद्र के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यहां प्रस्तावित डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल यूनिट में सालाना 22 लाख टन से अधिक उत्पाद तैयार होने की क्षमता विकसित होगी। इससे प्लास्टिक, पैकेजिंग, फार्मा और ऑटोमोबाइल उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में पॉलिमर आधारित उद्योगों के विस्तार के लिए रायसेन जिले के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर के बिलौआ में 93 एकड़ में प्लास्टिक पार्क विकसित किए गए हैं। धार के पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, विजयपुर की गैस प्रसंस्करण सुविधाओं और आष्टा की प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल परियोजना को भी औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को पिछले पौने तीन वर्षों में 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि इनमें से करीब 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। प्रदेश में पर्याप्त बिजली और जल, औद्योगिक भूमि, सड़क नेटवर्क, एयरपोर्ट, कंटेनर डिपो और प्रशिक्षित श्रमशक्ति निवेशकों के लिए अनुकूल आधार तैयार करते हैं। मुख्यमंत्री ने कृषि-रसायन, विशिष्ट रसायन और निर्यातोन्मुख उद्योगों से जुड़ी कंपनियों को भी मध्यप्रदेश में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई को भी मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, ताकि निवेश का लाभ रोजगार और स्थानीय औद्योगिक विकास तक पहुंचे।
उद्योगपतियों के साथ निवेश पर चर्चा
इंडिया केम-2026 के दौरान मुख्यमंत्री ने वस्त्र, उच्च शिक्षा, उर्वरक और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें कीं। भीलोस इंडस्ट्रीज के साथ धार के पीएम मित्र पार्क और भैसोला औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजनाओं पर चर्चा हुई। कंपनी की दोनों परियोजनाओं में लगभग 7,500 करोड़ रुपये के निवेश और 3,750 रोजगार के अवसर प्रस्तावित हैं। मध्य भारत फॉस्फेट की मेघनगर में करीब 350 करोड़ रुपये की एकीकृत उर्वरक परियोजना और पूर्वी मध्यप्रदेश में लगभग 700 करोड़ रुपये की नई इकाई की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। वहीं, ल्यूपिन लिमिटेड ने प्रदेश में करीब 350 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। देवास के निकट एआई और कंप्यूटर साइंस केंद्रित आवासीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना पर भी बातचीत हुई।
केंद्र सरकार का केमिकल पार्कों को बढ़ावा देने पर जोर
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि भारत की पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री का मौजूदा आकार लगभग 220 अरब डॉलर है, जिसे वर्ष 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार भव्य रसायन पार्कों के विकास के लिए प्रत्येक पार्क को 1,000 करोड़ रुपये की सहायता देगी। इसके अलावा, उन्नत पेट्रोकेमिकल और केमिकल क्षेत्र में शोध एवं विकास को प्रोत्साहित करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये के फंड का प्रावधान किया गया है।
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