
भोपाल। मुंबई से भोपाल आ रही इंडिगो फ्लाइट का टेक-ऑफ मंगलवार को अंतिम क्षणों में रोक दिया गया। पायलट को सिस्टम में तकनीकी संकेत मिलने के बाद सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विमान को रनवे पर ही रोक दिया गया। अचानक ब्रेक लगने से विमान में सवार 221 यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया।
रनवे पर रफ्तार पकड़ते ही मिला तकनीकी अलर्ट
जानकारी के अनुसार, एयरबस A321 Neo विमान ने दोपहर करीब 3:50 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने की प्रक्रिया शुरू की थी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल से अनुमति मिलने के बाद विमान रनवे पर तेज गति से आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान कॉकपिट सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी का संकेत मिला। पायलट ने तुरंत फैसला लेते हुए टेक-ऑफ निरस्त कर दिया।
अचानक ब्रेक लगते ही सहम गए यात्री
विमान के अचानक रुकने से यात्रियों को तेज झटका महसूस हुआ। कई लोगों ने इस अनुभव को बेहद तनावपूर्ण बताया। नियमित हवाई यात्रा करने वाले एक यात्री देवाशीष ने बताया कि रनवे पर तेज रफ्तार के बीच विमान का अचानक रुकना कुछ पल के लिए सभी को डरा गया। हालांकि, चालक दल ने स्थिति को शांतिपूर्वक संभाला।
इंजीनियरों ने की विस्तृत जांच
टेक-ऑफ रद्द होने के बाद विमान को रनवे से हटाकर पार्किंग बे में ले जाया गया, जहां इंजीनियरों की टीम ने विस्तृत तकनीकी जांच शुरू की। एयरलाइन ने पहले विमान की पूरी जांच कराई और सभी सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद ही दोबारा उड़ान की अनुमति दी।
हज यात्रियों समेत कई परिवारों को करना पड़ा इंतजार
इस फ्लाइट में करीब 25 हज यात्री भी सवार थे, जो यात्रा पूरी कर लौट रहे थे। भोपाल एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में परिजन पहले से मौजूद थे। उड़ान में देरी के कारण यात्रियों के परिजनों को निर्धारित समय से काफी अधिक इंतजार करना पड़ा।
करीब ढाई घंटे की देरी से भोपाल पहुंची फ्लाइट
करीब एक घंटे बाद यात्रियों को पूरी स्थिति की जानकारी दी गई। सभी सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद विमान ने शाम 6:26 बजे दोबारा उड़ान भरी। इसके बाद फ्लाइट रात करीब 7:40 बजे भोपाल पहुंची। राहत की बात यह रही कि पूरी घटना के दौरान किसी यात्री या चालक दल के सदस्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
तकनीकी खराबी पर एयरलाइन ने नहीं दी विस्तृत जानकारी
एयरलाइन ने अब तक यह नहीं बताया है कि तकनीकी संकेत किस सिस्टम से जुड़ा था। हालांकि, विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि टेक-ऑफ के अंतिम चरण में उड़ान रोकना सामान्य स्थिति नहीं होती, लेकिन जब भी किसी संभावित तकनीकी जोखिम का संकेत मिलता है तो सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ऐसा निर्णय लेना सबसे सुरक्षित और जरूरी माना जाता है।
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