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इंदौर में बस पास 200 से 600 रुपये हुआ, महापौर योजना बंद; छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों पर बढ़ा खर्च

16 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
इंदौर में बस पास 200 से 600 रुपये हुआ, महापौर योजना बंद; छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों पर बढ़ा खर्च
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

इंदौर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट अब छात्रों के लिए सस्ता नहीं रहा। बस पास की कीमत में भारी बढ़ोतरी ने सीधे उनकी जेब पर असर डाला है। पहले जहां 200 रुपये में काम चल जाता था, अब वही पास 600 रुपये में मिलेगा—यानी तीन गुना खर्च।


महापौर पास योजना बंद, बढ़ा आर्थिक बोझ

Atal Indore City Transport Services Limited के संचालन में बदलाव के साथ ही बड़ा फैसला लिया गया है। नगर निगम से मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद होने के कारण महापौर मासिक पास योजना खत्म कर दी गई है। इस फैसले से हजारों छात्रों, दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों पर सीधा असर पड़ा है। अब सवाल उठ रहा है—क्या यह फैसला वापस लिया जा सकता है?


200 से सीधे 600 रुपये हुआ मासिक पास

पहले छात्र महज ₹200 में मासिक पास लेकर पूरे महीने यात्रा कर सकते थे। अब नई व्यवस्था के तहत उन्हें ₹600 खर्च करने होंगे। यानी हर महीने ₹400 का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। यह बढ़ोतरी खासतौर पर उन परिवारों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है, जो पहले से ही सीमित बजट में गुजारा कर रहे हैं।


50% छूट के बाद भी महंगा साबित हुआ पास

AICTSL ने नया मॉडल लागू करते हुए ₹1200 के पास पर 50% छूट देने की बात कही है। इस छूट के बाद छात्रों, दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को पास ₹600 में मिल रहा है। लेकिन पहले की तुलना में यह अब भी काफी महंगा है। यानी राहत के बावजूद असल में खर्च बढ़ा ही है—जो लोगों को परेशान कर रहा है।


अब 8 जिलों तक बढ़ेगा सेवा क्षेत्र

राज्य सरकार की मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के तहत ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव किया गया है। अब AICTSL का कार्यक्षेत्र नगर निगम सीमा से आगे बढ़कर संभाग के 8 जिलों तक विस्तारित होगा। इस विस्तार से सेवाएं तो बढ़ेंगी, लेकिन क्या आम लोगों के लिए यह किफायती भी रहेगा—यह देखना अहम होगा।


क्या फिर शुरू हो सकती है योजना?

पहले नगर निगम हर महीने करीब ₹1.5 से 1.75 करोड़ की सहायता देता था, जिससे यह योजना चल रही थी। अगर भविष्य में निगम दोबारा आर्थिक सहयोग देता है, तो महापौर पास योजना फिर से शुरू हो सकती है। फिलहाल, बढ़ी हुई कीमतों के बीच छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है—और सभी की नजर अब अगले फैसले पर टिकी है।

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