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इंदौर में अब फ्लैट में भी चल सकेगी इंडस्ट्री, मेट्रो के आसपास बनेंगे मॉल और IT पार्क, जानिए प्लान

30 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
इंदौर में अब फ्लैट में भी चल सकेगी इंडस्ट्री, मेट्रो के आसपास बनेंगे मॉल और IT पार्क, जानिए प्लान
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में बड़े शहरों की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। भोपाल के बाद अब इंदौर के लिए तैयार ड्राफ्ट में आधुनिक शहरी सुविधाओं के साथ उद्योग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और वर्टिकल डेवलपमेंट को प्रमुखता दी गई है।


इंदौर की प्लानिंग में GIFT City और दिल्ली-NCR के मॉडल का अध्ययन भी शामिल रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में ग्रीन-ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी, मिक्स्ड लैंड यूज और शहर को अधिक आत्मनिर्भर बनाने वाले प्रावधानों पर ध्यान दिया गया है।


मेट्रो के आसपास बढ़ेगा कमर्शियल डेवलपमेंट

इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की अवधारणा के तहत ग्रोथ कॉरिडोर तैयार करने और उनके आसपास व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ाने की योजना है।


मेट्रो के दोनों तरफ Transit Oriented Development का प्रावधान रहेगा। इन क्षेत्रों में ज्यादा FAR के साथ मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, IT पार्क और Global Capability Centre विकसित किए जा सकेंगे।


हाईराइज निर्माण से बचेगी कृषि भूमि

मास्टर प्लान में शहर के फैलाव को नियंत्रित करने के लिए वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए FAR बढ़ाने और बड़ी सड़कों के साथ हाईराइज इमारतों के विकास पर जोर दिया गया है। शहर में अधिकांश फोर और सिक्सलेन सड़कें प्रस्तावित हैं। कॉलोनियों के भीतर सड़कों की चौड़ाई कम से कम 9 मीटर रखने का प्रावधान किया जा रहा है।


GIFT City की तरह मिलेगी वॉक-टू-वर्क सुविधा

शहरी जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। जरूरत के मुताबिक ओवरब्रिज, अंडरब्रिज और चौड़ी सड़कों को मास्टर प्लान में जगह दी गई है। GIFT City की तर्ज पर वॉक-टू-वर्क सुविधा विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रावधान किए गए हैं।


शहर अपनी ऊर्जा और कचरे का प्रबंधन खुद करेगा

मास्टर प्लान में सेल्फ-सस्टेनेबल शहर की अवधारणा को भी शामिल किया गया है। इसके तहत ऊर्जा और कचरा प्रबंधन जैसी आवश्यकताओं को स्थानीय स्तर पर पूरा करने वाली व्यवस्थाओं पर जोर रहेगा। आर्थिक गतिविधियों और आबादी में वृद्धि वाले शहरों में ग्रीन-ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना है। इसके साथ असीमित FAR, सड़क की चौड़ाई के आधार पर मिक्स्ड लैंड यूज, ग्रीन TDR, लोकल एरिया प्लानिंग और पार्किंग से जुड़े प्रावधान भी रखे जा रहे हैं।


फ्लैट में भी लग सकेगी कुछ श्रेणी की इंडस्ट्री

औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए मास्टर प्लान में फ्लैटेड इंडस्ट्री का प्रावधान किया गया है। इसके तहत बहुमंजिला इमारतों के फ्लैट में भी उद्योग स्थापित किए जा सकेंगे। व्हाइट और ग्रीन श्रेणी के उद्योग कॉलोनियों के भीतर चलाने की अनुमति का प्रावधान रहेगा। इससे उत्पादन और रोजगार बढ़ाने पर जोर है।


सुविधाएं देने वाले कॉलोनाइजर को अतिरिक्त FAR

निजी कॉलोनाइजरों के लिए भी प्रोत्साहन का प्रावधान रखा गया है। यदि कोई कॉलोनाइजर अपनी कॉलोनी में अस्पताल, स्कूल या वृद्धाश्रम विकसित करता है तो उसे ज्यादा FAR मिलने की व्यवस्था की जा सकेगी।


कई धार्मिक और पर्यटन शहरों की भी होगी नई प्लानिंग

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग मध्य प्रदेश के संचालक कौशलेन्द्र विक्रम सिंह के अनुसार धार्मिक शहरों और पर्यटन स्थलों के लिए भी अलग मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं। उज्जैन का नया मास्टर प्लान लागू हो चुका है। ओंकारेश्वर, चित्रकूट, महेश्वर, मांडू, ओरछा, सांची, सलकनपुर और अमरकंटक के लिए नए मास्टर प्लान तैयार किए जाएंगे।


इन शहरों में बढ़ती धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को देखते हुए 30 से 50 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्लानिंग की जाएगी। आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास को भी इसमें शामिल किया जाएगा।


गुजरात और दिल्ली की प्लानिंग से लिया गया संदर्भ

इंदौर के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने से पहले T&CP की टीम ने गुजरात की GIFT City और दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की प्लानिंग का अध्ययन किया था। इसी अनुभव के आधार पर आधुनिक शहरी सुविधाओं, परिवहन, हरित ढांचे और वर्टिकल विकास से जुड़े प्रावधानों को मास्टर प्लान में जगह दी गई है।

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