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इंदौर-उज्जैन मेट्रो प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव संभव, स्टेशनों और रूट पर मंथन, 2028 सिंहस्थ से पहले पूरा करने का लक्ष्य

23 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
इंदौर-उज्जैन मेट्रो प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव संभव, स्टेशनों और रूट पर मंथन, 2028 सिंहस्थ से पहले पूरा करने का लक्ष्य
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

इंदौर से उज्जैन के बीच प्रस्तावित मेट्रो अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। DPR तैयार हो चुकी है, लेकिन अंतिम मंजूरी से पहले बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। इससे पूरे प्रोजेक्ट की तस्वीर बदल सकती है।


DPR तैयार, अब रिव्यू में बड़े बदलाव की संभावना

Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) ने मेट्रो प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर प्रबंधन को सौंप दी है। लेकिन अंतिम मुहर से पहले इंजीनियरिंग स्तर पर गहन समीक्षा जारी है। खासकर स्टेशनों की संख्या और लोकेशन को लेकर कई अहम बदलाव सामने आ सकते हैं। अब सभी की नजर इस रिव्यू पर टिकी है।


11 स्टेशनों की लिस्ट में हो सकता है फेरबदल

DPR में प्रस्तावित 11 स्टेशनों की संख्या और स्थान दोनों में बदलाव संभव है। यात्रियों की संभावित संख्या, ट्रैफिक फ्लो और जमीन की उपलब्धता को देखते हुए कुछ स्टेशन आगे-पीछे किए जा सकते हैं। यानी फाइनल रूट अभी तय नहीं है और इसमें बड़ा ट्विस्ट आ सकता है।


उज्जैन में अंडरग्राउंड मेट्रो का प्लान

उज्जैन शहर के भीतर मेट्रो को अंडरग्राउंड करने का प्रस्ताव भी जोड़ा गया है। अगर यह मंजूर होता है, तो स्टेशन संख्या में बदलाव हो सकता है। साथ ही लागत और निर्माण समय पर भी असर पड़ेगा। यही कारण है कि इस हिस्से पर सबसे ज्यादा फोकस किया जा रहा है।


लवकुश चौराहे से महाकाल तक कनेक्टिविटी

इंदौर के लवकुश चौराहे से शुरू होकर यह मेट्रो महाकाल मंदिर तक जाएगी। रूट में भौरासला, बारोली, निनोरा, त्रिवेणी घाट, नानाखेड़ा और ISBT जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं। हालांकि, रिव्यू के बाद इन स्थानों में भी बदलाव संभव है।


10,000 करोड़ का प्रोजेक्ट, समय सीमा अहम

इस मेट्रो प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब ₹10,000 करोड़ है। सरकार का लक्ष्य है कि इसे 2028 सिंहस्थ से पहले पूरा कर लिया जाए, ताकि लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके। लेकिन क्या यह डेडलाइन पूरी हो पाएगी?


सिंहस्थ 2028: बड़ी तैयारी की जरूरत

सिंहस्थ 2028 का आयोजन 27 मार्च 2028 से 27 मई 2028 तक होगा। इस दौरान करीब 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में मेट्रो प्रोजेक्ट इस आयोजन के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।


आगे क्या?

फिलहाल प्रोजेक्ट फाइन ट्यूनिंग के दौर में है, जहां हर तकनीकी पहलू की जांच हो रही है। जैसे ही संशोधित DPR को मंजूरी मिलेगी, मेट्रो प्रोजेक्ट तेजी से जमीन पर उतर सकता है। अब देखना होगा कि बदलाव के बाद इसका अंतिम स्वरूप कैसा होता है।

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