
भोपाल। मध्यप्रदेश के शहरी विकास और निवेश की दिशा तय करने के लिए इंदौर में बुधवार, 28 अक्टूबर को अर्बन कॉन्क्लेव आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे और निवेशकों के साथ सीधे चर्चा करेंगे।
कॉन्क्लेव में नीति आयोग की इंदौर आर्थिक क्षेत्र (IER) 2047 महायोजना का विमोचन होगा। इसमें मालवा-निमाड़ के आठ जिलों को एक आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने, नए औद्योगिक केंद्र बनाने और परिवहन नेटवर्क के विस्तार की रूपरेखा शामिल है। कार्यक्रम में ₹2,013 करोड़ के एमओयू होने की जानकारी भी दी गई है।
2047 तक इंदौर आर्थिक क्षेत्र को नई ऊंचाई पर ले जाने की योजना
नीति आयोग की महायोजना में इंदौर सहित मालवा-निमाड़ के आठ जिलों को एकीकृत आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके तहत वर्तमान 37.4 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2047 तक 500 से 600 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना के प्रमुख आर्थिक लक्ष्य हैं:
- 12 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना।
- 100 अरब डॉलर से ज्यादा निजी निवेश आकर्षित करना।
- शहर में 200 एकड़ का वेयरहाउसिंग और ट्रक टर्मिनल जोन विकसित करना।
5,000 एकड़ में फ्यूचर सिटी, पुराने इलाकों का पुनर्विकास
इंदौर में करीब 5,000 एकड़ क्षेत्र में फ्यूचर सिटी विकसित करने का प्रस्ताव है। शहरी पुनर्विकास के लिए परदेशीपुरा, कुलकर्णी नगर, जूनी इंदौर और हुकमचंद मिल क्षेत्र को चिह्नित किया गया है।
शहर की कनेक्टिविटी और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए 20 से 30 एकड़ में मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब बनाने तथा छह छोटे ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) आधारित बिजनेस डिस्ट्रिक्ट विकसित करने की योजना भी शामिल है।
IIT इंदौर के आसपास बनेगा AI और IT का केंद्र
तकनीकी निवेश को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी इंदौर के आसपास 200 एकड़ में आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) विकसित करने का प्रस्ताव है।
इस परिसर में इंडस्ट्रियल AI लैब, डेटा सेंटर, स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर और प्रशिक्षण सुविधाएं स्थापित करने की योजना है। महायोजना में इस पहल से लगभग ₹8,000 करोड़ के संभावित आईटी निर्यात प्रभाव का अनुमान लगाया गया है।
EV से लेकर बैटरी रीसाइकलिंग तक, उद्योगों के लिए नए क्लस्टर
औद्योगिक विस्तार के लिए पीथमपुर में इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी क्षेत्र से जुड़े दो प्रमुख प्रस्ताव रखे गए हैं। इनमें 1,000 एकड़ का EV कंपोनेंट पार्क और 100 एकड़ का लिथियम-आयन बैटरी असेंबली एवं रीसाइकलिंग पार्क शामिल है।
अन्य प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र हैं:
- 1,000 एकड़ में लाइफ साइंसेज मैन्युफैक्चरिंग जोन।
- 80 एकड़ में पैकेजिंग क्लस्टर।
- 20 से 30 एकड़ में सस्टेनेबल इलेक्ट्रो प्लेटिंग क्लस्टर।
इन परियोजनाओं के साथ क्षेत्र में विनिर्माण और औद्योगिक निवेश के विस्तार की रूपरेखा तैयार की गई है।
उज्जैन-रतलाम के बीच 2,000 एकड़ का फूड प्रोसेसिंग हब
कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और खाद्य उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए उज्जैन-रतलाम के बीच 2,000 एकड़ में इंटरनेशनल फूड प्रोसेसिंग हब बनाने का प्रस्ताव है।
योजना के अनुसार इंदौर और रतलाम में नमकीन तथा सोया-मक्का आधारित उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। धार में आलू और केले के चिप्स उद्योग के साथ इंदौर में डेयरी और प्याज प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों को विस्तार देने की योजना है।
2042 से 2047 के बीच तीन नए मेट्रो कॉरिडोर का प्रस्ताव
महायोजना में वर्ष 2042 से 2047 के चरण के लिए इंदौर में तीन नए मेट्रो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। इनकी कुल लंबाई 36 किलोमीटर है।
सेंट्रल जेल से देवास नाका: 8 किमी
खालसा चौक से देवगुराड़िया बायपास: 17 किमी
मह नाका नाका से तेजाजी नगर: 11 किमी
इसके अलावा इंदौर से देवास के बीच लगभग 27 किलोमीटर का क्षेत्रीय रेल कॉरिडोर प्रस्तावित है। इंदौर-उज्जैन क्षेत्रीय मेट्रो और इंदौर-पीथमपुर स्पर लाइन भी भविष्य के परिवहन प्रस्तावों में शामिल हैं।
निवेशकों से सीधे बातचीत करेंगे मुख्यमंत्री
डॉ. मोहन यादव कॉन्क्लेव के दौरान निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठक करेंगे। इन बैठकों में शहरी परियोजनाओं में निवेश, योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य सरकार के नगरीय विकास संबंधी विजन को सामने रखना, शहरी अधोसंरचना में निवेश आकर्षित करना और आधुनिक तकनीक के जरिए शहरों को अधिक सुविधाजनक एवं टिकाऊ बनाना है।
श्रेणी-2 के शहरों के विकास पर भी रहेगा जोर
कॉन्क्लेव में केवल महानगरों तक विकास सीमित रखने के बजाय श्रेणी-2 के शहरों की जरूरतों पर विशेष सत्र आयोजित होंगे। इनमें शहरी पुनःघनीकरण, परिवहन आधारित विकास (TOD), विकास अधिकार हस्तांतरण (TDR), आवास, पुनर्विकास और मास्टर प्लान जैसे मुद्दे शामिल हैं।
विकास गलियारों, रेरा स्वीकृतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, अनापत्ति प्रमाण-पत्रों (NOC) में कमी और फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
डिजिटल गवर्नेंस और भवन मंजूरी प्रक्रिया में सुधार
नगरीय प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक और नियामकीय प्रक्रियाओं में सुधार पर चर्चा होगी। प्रमुख विषयों में स्वचालित भवन अनुज्ञा अनुमोदन प्रणाली (ABPAS), ऑनलाइन NOC, विकास अनुज्ञा प्रणाली और कॉलोनी अधिनियम शामिल हैं।
इसके साथ GIS आधारित नियोजन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और परियोजना प्रबंधन सूचना प्रणाली पर भी मंथन किया जाएगा।
जल सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण-अनुकूल शहर
जलवायु अनुकूल शहरी विकास, जल सुरक्षा और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े सत्रों में विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। जल के पुनः उपयोग और प्रबंधन, अमृत 2.0, BRSR फ्रेमवर्क और नमो हरित नगर योजना पर चर्चा होगी।
सिटी फॉरेस्ट, सेंट्रल पार्क, वायु गुणवत्ता में सुधार, ईज ऑफ लिविंग, लिवेबिलिटी इंडेक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन भी एजेंडे का हिस्सा हैं। कचरे से ऊर्जा उत्पादन, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF), सौर ऊर्जा परियोजनाओं और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) इकोसिस्टम पर भी विचार किया जाएगा।
शहरी परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने के विकल्प
कॉन्क्लेव में शहरी निवेश के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने और विभिन्न संस्थाओं के साथ साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा होगी। अर्बन चैलेंज फंड की परियोजनाओं और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के मॉडल पर विशेष ध्यान रहेगा।
वित्तीय मॉडलिंग, टेंपल बॉन्ड, ग्रीन बॉन्ड, नगर पालिका बॉन्ड, संयुक्त उपक्रम, बहुपक्षीय बैंकों से वित्त पोषण, अनुदान और वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसे विकल्प भी विचार-विमर्श में शामिल होंगे।
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