
भोपाल में इन दिनों संघ शताब्दी वर्ष की एक खास हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत दो दिवसीय प्रवास पर राजधानी पहुंचे और कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में युवाओं से सीधे संवाद किया। सवाल-जवाब के इस खुले मंच पर युवाओं की जिज्ञासा भी दिखी और भविष्य के भारत को लेकर उनकी उम्मीदें भी। माहौल बिल्कुल औपचारिक भाषण जैसा नहीं, बल्कि अपनापन और सीधी बातों से भरा रहा।
युवा संवाद में खुलकर बोले सरसंघचालक
युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर से आए सतेंद्र दुबे ने सवाल पूछा कि संघ के 100 वर्ष पूरे हो चुके हैं, अब “विकसित भारत” के निर्माण में संघ की भूमिका क्या होगी? इस पर डॉ. मोहन भागवत ने बिना लाग-लपेट कहा कि आज देश की युवा पीढ़ी के मन में यह भावना जाग चुकी है कि वे भारत को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि बदलते वैश्विक हालात में दुनिया के कई देश भारत से कुछ सीखने की इच्छा भी दिखा रहे हैं। हालांकि कितना सीखा जाएगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन भारत को देखने का नजरिया जरूर बदला है।
“विश्व सत्य नहीं, शक्ति सुनता है” – मोहन भागवत
अपने जवाब में सरसंघचालक ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा – “विश्व सत्य नहीं सुनता, विश्व शक्ति सुनता है।” उन्होंने समझाया कि जिनके पास शक्ति होती है, उनकी बात मानी जाती है, चाहे वह सही हो या गलत। और जिनके पास सत्य होता है लेकिन वे दुर्बल होते हैं, उनकी आवाज कोई नहीं सुनता। उन्होंने कहा कि शक्ति केवल शरीर की नहीं होती, बल्कि शील, चरित्र और युक्ति यानी समझ-बूझ की भी होती है। इन तीनों स्तरों पर भारत को और सबल बनना होगा। संघ की भूमिका हमेशा से समाज को संगठित कर इस सामूहिक शक्ति को खड़ा करने की रही है।
दो दिनों में चार बड़े कार्यक्रम, हर वर्ग से संवाद
भोपाल प्रवास के दौरान सरसंघचालक कुल चार प्रमुख कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इन सभी कार्यक्रमों की खास बात यह है कि ये एकतरफा भाषण नहीं, बल्कि चयनित सहभागियों के साथ संवादात्मक स्वरूप में आयोजित किए जा रहे हैं।
युवा संवाद:
मध्यभारत प्रांत के 31 जिलों से आए वे युवा इसमें शामिल हुए, जिन्होंने शिक्षा, नवाचार, सेवा, सामाजिक कार्य और अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ नया किया है। इस मंच पर राष्ट्रनिर्माण, मूल्यों और जिम्मेदारी जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा हुई।
प्रमुखजन गोष्ठी:
शुक्रवार शाम रविन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और व्यवसायिक क्षेत्रों के प्रभावशाली लोगों के साथ विमर्श होगा। इसमें संघ की शताब्दी यात्रा और आज की सामाजिक चुनौतियों पर बात की जाएगी।
सामाजिक सद्भाव बैठक:
3 जनवरी सुबह कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में सभी समाजों के प्रतिनिधि जुटेंगे। उद्देश्य है – सामाजिक एकता और समरसता को और मजबूत करना।
शक्ति संवाद (मातृशक्ति से बातचीत):
3 जनवरी शाम 5 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में मातृशक्ति से परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर संवाद किया जाएगा। महिला सहभागिता को लेकर यह कार्यक्रम काफी अहम माना जा रहा है।
शताब्दी वर्ष में बढ़ी RSS को जानने की जिज्ञासा
संघ के 100 वर्ष पूरे होने के बाद समाज के हर वर्ग में आरएसएस को लेकर उत्सुकता बढ़ी है। लोग अब संगठन को सिर्फ सुनना नहीं, बल्कि समझना भी चाहते हैं। भोपाल में हो रहे इन कार्यक्रमों को इसी सोच से जोड़ा जा रहा है कि संघ आम नागरिकों से सीधे जुड़े और उन्हें यह बताए कि देश के विकास में उनकी भूमिका क्या हो सकती है।
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