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एमपी में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ शुरू: 139 दिन चलेगा अभियान, 2500 करोड़ से जल स्रोतों का होगा विकास

20 मार्च, 2026 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
एमपी में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ शुरू: 139 दिन चलेगा अभियान, 2500 करोड़ से जल स्रोतों का होगा विकास
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। पानी को जीवन की नींव और भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा बताते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को राज्य स्तरीय ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की शुरुआत की। यह एक बड़ा अभियान है जिसका उद्देश्य पानी बचाना और पुराने जल स्रोतों को फिर से जीवित करना है। यह अभियान गुड़ी पड़वा से शुरू होकर गंगा दशहरा तक चलेगा, यानी कुल 139 दिन तक। इस दौरान राज्य के सभी 55 जिलों में करीब 2500 करोड़ रुपये के विकास कार्य किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इंसान कुछ समय तक बिना भोजन के रह सकता है, लेकिन पानी के बिना नहीं। इसलिए हर व्यक्ति को पानी बचाने की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।


क्या-क्या काम होंगे अभियान में?

इस अभियान के तहत सरकार कई बड़े काम करेगी, जैसे:

- नए तालाब बनाना

- पुराने तालाबों और जल स्रोतों का पुनर्जीवन

- कुएं और बावड़ियों की मरम्मत

- नहरों को सुधारना

- सूखी नदियों को फिर से जीवित करना

- 10,000 से ज्यादा चेक डैम और स्टॉप डैम का रखरखाव

- भूजल स्तर बढ़ाने और पीने के पानी की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान


इंदौर में 23 करोड़ के प्रोजेक्ट शुरू

मुख्यमंत्री ने इंदौर में 23 करोड़ रुपये से ज्यादा के जल संरक्षण और विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया। इसमें खास तौर पर बिलावली, लिंबोदी, छोटा सिरपुर और निपानिया तालाबों के पुनर्जीवन के काम शामिल हैं।


जनभागीदारी पर जोर

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि इस अभियान को सिर्फ सरकारी योजना न मानें, बल्कि इसे जन आंदोलन बनाएं। उन्होंने कहा कि जागरूकता, सामूहिक प्रयास और पारंपरिक तरीकों से लोग इसमें भाग लें। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी कहा कि पानी सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जीवन और विकास का आधार है। उन्होंने तालाब, कुएं और बावड़ियों जैसी पारंपरिक जल संरचनाओं को बचाने पर जोर दिया।


इंदौर बनेगा नंबर-1

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भरोसा जताया कि इंदौर इस अभियान में सबसे आगे रहेगा। उन्होंने बताया कि शहर में 27 तालाबों का पुनर्जीवन किया जा रहा है, सैकड़ों कुएं और बावड़ियां सुधारी जा रही हैं। इसमें जनता और कॉर्पोरेट कंपनियों (CSR) की भी भागीदारी है


अब तक क्या हुआ और आगे की योजना

अधिकारियों के अनुसार, पहले चरणों में 282 प्राचीन कुओं का पुनर्जीवन, 21 बावड़ियों की सफाई, 25,000 से ज्यादा इमारतों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जोड़ा गया है। 


आगे 2026–27 की योजना

- 10 तालाबों को गहरा और पुनर्जीवित करना

- 250 कुएं और 27 बावड़ियों को सुधारना

- 10,000 और इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग

- 200 रिचार्ज शाफ्ट बनाना


संस्कृति और पर्यावरण का संदेश

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने इंदौर के इस्कॉन मंदिर में पूजा की और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लिया। उन्होंने लोगों को पानी बचाने की शपथ भी दिलाई और कहा कि नदियां धरती की नसों की तरह होती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विरासत से विकास’ के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश परंपरा और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहा है।

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