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जल गंगा संवर्धन अभियान की दुनिया में गूंज, 6 देशों ने MP मॉडल अपनाने में दिखाई दिलचस्पी

08 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
जल गंगा संवर्धन अभियान की दुनिया में गूंज, 6 देशों ने MP मॉडल अपनाने में दिखाई दिलचस्पी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। जल गंगा संवर्धन अभियान अब सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहा। भोपाल में आयोजित सदानीरा समागम में छह देशों के राजनयिकों ने प्रदेश के जल संरक्षण मॉडल की सराहना करते हुए इसे वैश्विक स्तर पर अपनाने योग्य बताया। यही वजह है कि अब यह पहल अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है। प्रदेश सरकार के मुताबिक, जनभागीदारी आधारित इस अभियान ने जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं। कार्यक्रम में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों ने भी इसे भविष्य की बड़ी जरूरत बताया। आइए जानते हैं आखिर ऐसा क्या है इस मॉडल में जिसने दुनिया का ध्यान खींच लिया।


जल संरक्षण मॉडल को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता

भोपाल के भारत भवन में आयोजित सदानीरा समागम में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और इक्वाडोर के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी ने जल संरक्षण को वैश्विक चुनौती बताते हुए मध्यप्रदेश के प्रयासों की प्रशंसा की। विदेशी प्रतिनिधियों का मानना रहा कि सरकार और समाज की संयुक्त भागीदारी से चलाया जा रहा यह मॉडल कई देशों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। इसी वजह से कार्यक्रम में इस मॉडल को लेकर विशेष रुचि देखने को मिली।


जल संकट से निपटने के लिए जनजागरूकता पर जोर

साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस वराईओनाइडेस ने कहा कि जल संकट जैसी समस्या का समाधान केवल तकनीक से नहीं बल्कि लोगों की जागरूकता से संभव है। उन्होंने अभियान को समाज को जोड़ने वाली प्रभावी पहल बताया। फिजी के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में जल संरक्षण की दिशा में सामुदायिक प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनकी यह टिप्पणी अभियान की उपयोगिता को और मजबूत करती है।


संस्कृति और पर्यावरण को जोड़ने की पहल की सराहना

मेक्सिको दूतावास की संस्कृति प्रमुख वनेसा एड्रियन ने जल संरक्षण को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के प्रयास को सराहनीय बताया। उनके अनुसार पर्यावरणीय चेतना को संस्कृति के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना अधिक प्रभावी तरीका हो सकता है। नेपाल दूतावास के प्रथम सचिव दीपक पोरखिरे ने कहा कि यह आयोजन प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संरक्षण का संदेश देता है। वहीं त्रिनिदाद एवं टोबैगो के उच्चायुक्त चंद्रदत्त सिंह ने सांस्कृतिक मंचों के जरिए पर्यावरणीय विषयों को जन-जन तक पहुंचाने की पहल की प्रशंसा की।


इक्वाडोर ने दिखाई विशेष रुचि

कार्यक्रम के दौरान सबसे दिलचस्प घोषणा इक्वाडोर की ओर से सामने आई। इक्वाडोर के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जॉर्ज विनिशियो अनरंगो ने कहा कि उनका देश मध्यप्रदेश के अनुभवों से प्रेरणा लेकर जल संरक्षण केंद्रित इसी तरह का आयोजन आयोजित करने पर विचार करेगा। यह संकेत बताता है कि मध्यप्रदेश का मॉडल अब सीमाओं से बाहर भी प्रभाव छोड़ रहा है और अन्य देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।


2.12 लाख जल संरचनाएं पूरी, लक्ष्य 3.66 लाख

प्रदेश सरकार के अनुसार जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत अब तक 2.12 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण या पुनर्जीवन किया जा चुका है। इनमें तालाब, कुएं, जलाशय और अन्य जल संरक्षण ढांचे शामिल हैं। सरकार ने इस संख्या को बढ़ाकर 3.66 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से काम जारी रहा तो मध्यप्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में देश ही नहीं, दुनिया के लिए भी एक मजबूत उदाहरण बन सकता है।

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